सितंबर 2026 तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने Spectrum Electrical, Meesho, Neogen Chemicals और Aditya Infotech में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा दी है। ये कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इनपुट कॉस्ट और एग्जीक्यूशन रिस्क पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
सितंबर 2026 की तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने हाई-ग्रोथ कंपनियों पर भरोसा जताते हुए इनमें जमकर खरीदारी की है। यह ट्रेंड इशारा करता है कि बड़ी संस्थाएं उन कंपनियों को तरजीह दे रही हैं जो तेजी से अपना स्केल बढ़ा रही हैं, चाहे वह प्रेफरेंशियल इश्यू हो या QIP।
Spectrum Electrical और Aditya Infotech की रणनीति
Spectrum Electrical Industries में DIIs की हिस्सेदारी पिछले तिमाही के 0.36% से उछलकर 7.62% हो गई है। कंपनी ने कर्ज कम करने के लिए प्रेफरेंशियल शेयर इश्यू का रास्ता अपनाया है। कंपनी का रेवेन्यू 80% बढ़कर ₹154 करोड़ पहुंच गया है, जिसका श्रेय EV चार्जिंग कंपोनेंट्स में एंट्री को जाता है। हालांकि, तांबे और पॉलिमर जैसी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव मार्जिन के लिए चुनौती बना हुआ है।
वहीं, CP PLUS ब्रांड वाली कंपनी Aditya Infotech में DIIs की हिस्सेदारी बढ़कर 15.80% हो गई है। कंपनी ने हाल ही में ₹1,500 करोड़ का QIP पूरा किया है, जिसमें Kotak, ICICI Prudential और BlackRock जैसे बड़े नाम शामिल रहे। AI-इनेबल्ड सर्विलांस प्रोडक्ट्स के चलते कंपनी का EBITDA मार्जिन 14.8% रहा और रेवेन्यू ₹1,402 करोड़ दर्ज किया गया।
Meesho और Neogen Chemicals का जोर
Meesho में भी संस्थागत रुचि बढ़ी है, जहाँ हिस्सेदारी 9.14% से बढ़कर 13.60% हो गई है। कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल 48% की छलांग के साथ ₹3,713 करोड़ रहा। कंपनी घाटे को कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह प्रॉफिटेबिलिटी की राह पकड़ पाएगी।
Neogen Chemicals में हिस्सेदारी 3.83% बढ़कर 23.43% पर पहुंच गई है। कंपनी अब बैटरी केमिकल्स की ओर रुख कर रही है, जिसमें जापान की Morita Investment के साथ जॉइंट वेंचर और ₹600 करोड़ का QIP शामिल है। हालांकि दहेज प्लांट में लगी आग के बाद रिकवरी का काम जारी है, लेकिन बाजार की नजर अब FY27 के लिए बैटरी मटेरियल प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन पर है।
