क्यों बांटे जा रहे हैं इतने सारे डिविडेंड?
आने वाले हफ़्ते, 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच, भारतीय शेयर बाज़ार में कॉर्पोरेट एक्शन की एक बड़ी लहर देखने को मिलेगी। 50 से ज़्यादा कंपनियां निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और बाज़ार की मौजूदा उथल-पुथल के बीच उन्हें बड़ा रिटर्न देने की तैयारी में हैं। इस रणनीति में अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) का ऐलान, बोनस शेयर (bonus share) और स्टॉक स्प्लिट (stock split) शामिल हैं।
डिविडेंड की बौछार, ये हैं बड़ी घोषणाएं:
कंपनियां अपने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा शेयरधारकों में बांट रही हैं। इस लिस्ट में Escorts Kubota सबसे आगे है, जिसने ₹18 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। इसके बाद Torrent Power और Nirlon ₹15 प्रति शेयर के साथ हैं। MSTC ₹7.6 प्रति शेयर, जबकि Oil India और Uniparts India ₹7 प्रति शेयर का डिविडेंड देंगी।
वहीं, Coal India जैसी कंपनियां, जो लगातार अच्छा डिविडेंड देती रही हैं, इस बार भी 6.3% से 6.9% तक का डिविडेंड यील्ड (dividend yield) दे सकती हैं। यह उनके 8.3 से 14.4 के P/E रेशियो की तुलना में काफी आकर्षक है। इसके विपरीत, Apollo Hospitals ₹10 प्रति शेयर डिविडेंड दे रही है, लेकिन इसका डिविडेंड यील्ड महज़ 0.25% से 0.28% है, जबकि P/E रेशियो 61 से ऊपर है। यह दिखाता है कि कंपनियां शेयरधारकों को रिटर्न देने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं।
सिर्फ डिविडेंड ही नहीं, Riddhi Steel and Tube ( 1:2 के रेश्यो में) और Bazel International ( 1:1 के रेश्यो में) बोनस शेयर जारी करेंगी, जबकि Titan Biotech का स्टॉक स्प्लिट होगा।
बाज़ार का हाल और इन शेयरों पर असर:
फिलहाल, शेयर बाज़ार में थोड़ी नरमी देखी जा रही है। Nifty 50 इंडेक्स 25,500 से 26,000 के बीच बना हुआ है। इस नरमी की एक बड़ी वजह आईटी (IT) सेक्टर में आई भारी गिरावट है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डर से पिछले हफ़्ते लगभग 11.4% और इस साल अब तक 16.6% तक गिर चुका है।
इस माहौल में, जहां IT सेक्टर दबाव में है, वहीं पावर और मेटल जैसे सेक्टर में इस महीने की शुरुआत में तेज़ी देखी गई थी। बजट 2026 के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस से रोड, पावर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को फायदा हो सकता है।
क्या डिविडेंड ही काफी है?
भले ही डिविडेंड का ऐलान निवेशकों को लुभा रहा हो, पर कुछ बातों पर गौर करना ज़रूरी है। IT सेक्टर का हाल दिखाता है कि कैसे अचानक आए बड़े बदलाव (जैसे AI) शेयर की कीमतों और वैल्यूएशन (valuation) पर भारी पड़ सकते हैं। Apollo Hospitals जैसी कंपनियां, जिनका P/E रेशियो बहुत ज़्यादा है, ग्रोथ के प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं और अगर उनकी कमाई में गिरावट आई तो ये शेयर तेज़ी से गिर सकते हैं।
ऐतिहासिक तौर पर, डिविडेंड के ऐलान का शेयर की कीमतों पर असर मिला-जुला रहा है। कुछ रिसर्च के अनुसार, लंबे समय में इसका कोई खास फ़ायदा नहीं दिखता, और कभी-कभी तो लिक्विडिटी (liquidity) कम होने से शेयर की कीमत गिर भी जाती है। जब इतनी सारी कंपनियां एक साथ डिविडेंड देती हैं, तो इसका असर बंट जाता है और यह ज़रूरी नहीं कि सभी कंपनियों के शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी हो। अगर किसी कंपनी के फंडामेंटल (fundamental) में ही कमजोरी है, तो सिर्फ डिविडेंड से काम नहीं चलेगा।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि बाज़ार में अभी कंसोलिडेशन (consolidation) जारी रह सकता है, और स्टॉक-स्पेसिफिक परफॉर्मेंस ही मायने रखेगी। आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स और AI का कंपनियों की कमाई पर असर, ये सब बाज़ार की दिशा तय करेंगे। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के हालिया खरीदारी के रुझान से कुछ भरोसा बढ़ा है, पर सावधानी अभी भी बनी हुई है। कॉर्पोरेट अर्निंग्स (corporate earnings) और मैनेजमेंट की भविष्य की योजनाओं पर दी गई जानकारी, आने वाले दिनों में बाज़ार की राह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
