📉 Classic Filaments: ₹12 के ओपन ऑफर का पूरा सच
Classic Filaments Limited में कंट्रोल बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मिस्टर सुमित बंसल और उनके एसोसिएट्स ने कंपनी के 26% स्टेक (लगभग 15,89,471 इक्विटी शेयर्स) के लिए ₹12 प्रति शेयर के भाव से ओपन ऑफर निकाला है। यह ऑफर 11 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक खुला रहेगा। लेकिन, 28 जनवरी 2026 को शेयर का क्लोजिंग प्राइस ₹46 था, जो इस ऑफर प्राइस से लगभग 3.8 गुना ज्यादा है। यह भारी अंतर निवेशकों के लिए चिंता का सबब बन गया है।
🚫 कंपनी की मौजूदा हालत: सालों से ठप पड़ी 'Classic Filaments'
कंपनी की स्थिति की बात करें तो, यह लंबे समय से निष्क्रिय (Dormant) है। फाइनेंशियल ईयर 2023, 2024, 2025 और सितंबर 2025 तक के 6 महीनों में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू शून्य रहा है। इस वजह से कंपनी लगातार घाटे में चल रही है। सितंबर 2025 में खत्म हुई छमाही में लॉस आफ्टर टैक्स (PAT) ₹7.71 लाख था, जबकि FY25 में यह ₹10.96 लाख और FY24 में ₹9.99 लाख था। 30 सितंबर 2025 तक, शेयर की बुक वैल्यू प्रति शेयर मात्र ₹9.12 थी।
💰 बैलेंस शीट में बड़े सवाल: कर्ज़ और देनदारियां
कंपनी की बैलेंस शीट में कुछ चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। ₹549.62 करोड़ का लॉन्ग-टर्म लोन और एडवांसेज़ एक बड़ा सवाल है। इसके अलावा, अनसिक्योर्ड लोन सितंबर 2025 तक बढ़कर ₹33.53 करोड़ हो गया है। कंपनी पर कंटिंजेंट लायबिलिटीज का भी बोझ है, जिसमें GST से संबंधित लगभग ₹96 लाख और इनकम टैक्स के मामलों में ₹126.47 लाख शामिल हैं।
❓ निवेशक क्यों हैं नाराज? ₹46 का शेयर ₹12 में!
माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स की मुख्य नाराजगी ₹12 के ऑफर प्राइस और ₹46 के मार्केट प्राइस के बीच बड़े अंतर को लेकर है। यह लगभग 75% का भारी डिस्काउंट है। खरीदारों ने 24 अक्टूबर 2025 को ही प्रमोटर्स से ₹10 प्रति शेयर के भाव पर 68.51% हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया था। नए एक्वायरर्स का कहना है कि वे कंपनी को फिर से चालू करेंगे और गारमेंट्स, ट्रेडिंग, डाई-कास्टिंग और फाइनेंस जैसे नए क्षेत्रों में इसका विस्तार करेंगे। लेकिन, सालों से बिना किसी एक्टिविटी वाली कंपनी को रिवाइव करने की उनकी योजना कितनी सफल होगी, यह देखना बाकी है।
🚩 मुख्य जोखिम और आगे का रास्ता
शेयरधारकों के लिए कुछ अहम जोखिम ये हैं:
- वैल्यूएशन का बड़ा अंतर: ₹12 का ऑफर स्वीकार करने का मतलब है कि मौजूदा मार्केट प्राइस की तुलना में एक बड़ा नुकसान उठाना।
- डॉर्मंट ऑपरेशंस: कंपनी के पास कोई रेवेन्यू नहीं है और वह घाटे में है, इसलिए टर्नअराउंड की राह कठिन हो सकती है।
- रेगुलेटरी मंजूरी: ओपन ऑफर या भविष्य की योजनाओं के लिए सभी जरूरी सरकारी मंज़ूरियां समय पर मिलना जरूरी है।
- कंटिंजेंट लायबिलिटीज: GST और इनकम टैक्स जैसी देनदारियां कंपनी के लिए वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती हैं।
- मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS): ओपन ऑफर के बाद, यदि सभी शेयर ऑफर में सबमिट होते हैं, तो पब्लिक शेयरहोल्डिंग घटकर 5.49% रह जाएगी। कंपनी को भविष्य में SEBI के MPS नॉर्म्स को पूरा करने के लिए कदम उठाने होंगे, जो लिक्विडिटी पर असर डाल सकते हैं।
