Classic Filaments में ₹12 का Open Offer, ₹46 की मार्केट प्राइस से भारी डिस्काउंट
Classic Filaments Limited (CFL) में एक बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। एक्वायरर्स के एक समूह – मिस्टर सुमित बंसल, मिस्टर विक्कास बंसल, मिस्टर तरुण जैन और मिस्टर वरुण जिंदल – ने कंपनी के लिए एक Mandatory Open Offer शुरू किया है। यह ऑफर तब आया है जब उन्होंने 24 अक्टूबर 2025 को मौजूदा प्रमोटर्स से CFL के 68.51% इक्विटी शेयर ₹10 प्रति शेयर के भाव पर खरीदे थे। अब, यह ओपन ऑफर 11 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें वे 15,89,471 इक्विटी शेयर, यानी कंपनी की कुल पेड-अप कैपिटल का 26.00% हिस्सा, ₹12 प्रति शेयर के ऑफर प्राइस पर खरीदने का इरादा रखते हैं।
वैल्यूएशन का बड़ा अंतर और बंद पड़ा कारोबार
इस पूरे मामले की जड़ें वैल्यूएशन में बड़े अंतर में छिपी हैं। ऑफर प्राइस ₹12 प्रति शेयर, 28 जनवरी 2026 को दर्ज की गई मार्केट प्राइस ₹46.00 की तुलना में काफी कम है। हालात तब और गंभीर हो जाते हैं जब पता चलता है कि Classic Filaments पिछले तीन सालों से ऑपरेशनल तौर पर पूरी तरह निष्क्रिय है, और इस दौरान कंपनी ने कारोबार से शून्य आय दर्ज की है। हालांकि, कुछ मामूली एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चे हुए हैं। इसके अलावा, कंपनी पर कुछ कंटिंजेंट लायबिलिटीज भी हैं, जिनमें GST इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी ₹96 लाख की देनदारी और इनकम टैक्स एक्ट के तहत शो कॉज नोटिस के तहत ₹126.47 लाख की देनदारी शामिल है, जो अभी एडजुडिकेशन के तहत हैं।
निवेशकों के लिए ₹12 का भाव क्यों?
रिटेल शेयरधारकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक्वायरर्स ₹12 प्रति शेयर का भाव क्यों दे रहे हैं, जबकि शेयर की बाज़ार वैल्यू उससे तीन गुना से भी ज़्यादा है। एक्वायरर्स, जिन्हें गुड्स ट्रेडिंग, सेल्स, मार्केटिंग, डाई-कास्टिंग इंडस्ट्री और चार्टर्ड अकाउंटेंसी में अनुभव है, उनका कहना है कि वे अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करके CFL के बिजनेस को रिवाइव करना चाहते हैं। लेकिन, ऑफर प्राइस में इतना बड़ा डिस्काउंट निवेशकों के लिए एक बड़ा सवालिया निशान है, खासकर तब जब कंपनी तीन साल से बंद पड़ी हो।
जोखिम और आगे की राह
रिटेल निवेशकों के लिए यह फैसला बेहद जोखिम भरा है। यदि वे ₹12 में अपने शेयर बेचते हैं, तो उन्हें मार्केट प्राइस की तुलना में बड़ा नुकसान होगा, लेकिन उन्हें तुरंत बाहर निकलने का मौका मिल जाएगा। वहीं, अगर वे शेयर होल्ड करते हैं, तो उन्हें एक्वायरर्स की रिवाइवल योजना पर दांव लगाना होगा, जिसमें काफी एग्जीक्यूशन रिस्क और अनिश्चितताएं हैं।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यदि ओपन ऑफर पूरी तरह स्वीकार हो जाता है, तो एक्वायरर्स के पास CFL की लगभग 94.51% हिस्सेदारी होगी, जिससे कंपनी का कंट्रोल बदल जाएगा और नए प्रमोटर्स आ जाएंगे। एक और बड़ी चिंता मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नॉर्म्स का उल्लंघन हो सकती है, जिसे एक्वायरर्स ऑफर के 12 महीने के भीतर ठीक करने का वादा कर रहे हैं। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो रेगुलेटरी एक्शन या संभावित डिलिस्टिंग का खतरा हो सकता है, जिससे लिक्विडिटी और भविष्य के मूल्य पर असर पड़ेगा।
एक्वायरर्स ने इस ऑफर के लिए वित्तीय व्यवस्था कर ली है और उन्होंने एक एस्क्रो अकाउंट में ₹1.96 करोड़ जमा किए हैं, जो ऑफर के लिए अधिकतम संभावित भुगतान को कवर करता है।
