Citigroup (Citi) के एनालिस्ट्स ने भारतीय शेयर बाजार के लिए अपना Nifty 50 का टारगेट बढ़ाकर जून 2027 तक **26,800** कर दिया है। मजबूत तिमाही नतीजों से उत्साहित ब्रोकरेज हाउस वित्तीय (Financials), टेलीकॉम और हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों पर बुलिश (Bullish) है, वहीं IT और कंज्यूमर स्टेपल्स पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
Nifty का नया लक्ष्य और ब्रोकरेज की रणनीति
Citigroup (Citi) ने भारतीय इक्विटी मार्केट पर अपने नजरिए को अपडेट किया है। ब्रोकरेज हाउस ने Nifty 50 इंडेक्स के लिए जून 2027 तक का नया टारगेट 26,800 तय किया है, जो मार्च 2027 के लिए पहले के 26,000 के टारगेट से ज्यादा है। Citi का यह पॉजिटिव रुख पहली तिमाही (Q1) में कंपनियों के शानदार परफॉर्मेंस की बदौलत है। BSE 100 इंडेक्स की कंपनियों ने उम्मीदों से बेहतर नतीजे पेश किए हैं।
नतीजों का बूस्ट: EBITDA और नेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी
हालिया वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में 6% और नेट प्रॉफिट में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनर्जी सेक्टर को छोड़ दें तो टॉप-लाइन ग्रोथ 14% रही। यह दिखाता है कि मुश्किल आर्थिक माहौल के बावजूद, कई बड़ी कंपनियां अपनी ग्रोथ बनाए हुए हैं, जिसने ब्रोकरेज को मार्केट के प्रति आशावादी बनाए रखा है।
सेक्टर्स पर दांव: कहां निवेश, कहां बचें?
Citi ने निवेशकों के लिए एक स्पष्ट सेक्टर स्ट्रेटेजी (Strategy) बताई है। ब्रोकरेज हाउस वित्तीय (Financials), टेलीकॉम, हेल्थकेयर और यूटिलिटीज सेक्टरों पर ओवरवेट (Overweight) यानी ज्यादा फोकस करने की सलाह दे रहा है। वहीं, IT सर्विसेज, कंज्यूमर स्टेपल्स और मेटल्स जैसे सेक्टर्स पर सावधानी बरतने या अंडरवेट (Underweight) रहने की सलाह दी गई है। इस फेरबदल के तहत, Citi ने Axis Bank को अपने टॉप लार्ज-कैप स्टॉक पिक्स (Stock Picks) में शामिल किया है।
इन जोखिमों पर रखें नजर
पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद, रिपोर्ट में कुछ जोखिमों का भी जिक्र है जो प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। कंज्यूमर, इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल सेक्टरों में मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंटीग्रेशन की ओर बढ़ता रुझान भी चिंता का विषय हैं, जो प्रोडक्टिविटी और लागत को प्रभावित कर सकते हैं। टैक्स बेनिफिट्स (Tax Benefits) के असर के कम होने जैसी चुनौतियां भी मार्केट में वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ा सकती हैं।
निवेशकों को अगले कुछ तिमाहियों में अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) की रफ्तार और मार्जिन प्रेशर के असर पर पैनी नजर रखनी चाहिए। ब्रोकरेज का क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) और वेज हाइक्स (Wage Hikes) पर भरोसा बताता है कि इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की सुस्ती से मार्केट सेंटिमेंट (Market Sentiment) बदल सकता है।
