Lenskart पर Citi का 'Neutral' रुख, वैल्यूएशन को लेकर उठाई चिंता
Eye-wear सेक्टर में क्रांति लाने वाली कंपनी Lenskart Solutions पर अब ब्रोकरेज फर्म Citi का "Neutral" यानी 'न्यूट्रल' नजरिया सामने आया है। Citi ने Lenskart पर कवरेज शुरू करते हुए शेयर के लिए ₹500 का टारगेट प्राइस तय किया है, जो मौजूदा भाव से केवल 8% की मामूली बढ़त का संकेत देता है। Citi ने माना है कि Lenskart ने भारत के चश्मे उद्योग में बड़ा बदलाव लाया है और आगे भी ग्रोथ के अच्छे आसार हैं, लेकिन फर्म का मानना है कि कंपनी का शेयर मौजूदा स्तर पर पहले से ही मीडियम-टर्म की ग्रोथ को पूरी तरह से रिफ्लेक्ट कर रहा है।
क्यों है Citi की चिंता? वैल्यूएशन का गेम
Citi के एनालिस्ट्स Lenskart के बिजनेस मॉडल, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सप्लाई चेन और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) अप्रोच को खूब सराह रहे हैं। ये कंपनी की ताकत हैं, लेकिन Citi का कहना है कि इन सब की वजह से जो शेयर का भाव अभी चल रहा है, उसमें यह सारी अच्छी बातें पहले से ही शामिल हैं। यानी, शेयर की करंट वैल्यूएशन में कंपनी की आने वाली ग्रोथ और प्रॉफिट में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा पहले से ही जुड़ चुका है।
कंपनी का ग्रोथ आउटलुक और मार्जिन
Citi के अनुमान के मुताबिक, Lenskart का रेवेन्यू अगले 4 सालों (FY28 तक) में 22% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगा। वहीं, कंपनी के EBITDA मार्जिन में भी जबरदस्त सुधार की उम्मीद है। अनुमान है कि FY25 में जहां यह 5.7% के करीब था, वहीं FY28 तक बढ़कर 14% तक पहुंच सकता है। यह ग्रोथ ऑपरेटिंग लेवरेज और स्टोर के बेहतर प्रदर्शन से आएगी।
वैल्यूएशन की तुलना: Lenskart कितना महंगा?
Lenskart का वैल्यूएशन (P/E Ratio) वाकई में काफी हाई है। कंपनी का P/E Ratio जहां 200x से 300x के पार जाता दिख रहा है, वहीं इसी सेक्टर में शुमार Titan Company (जिसका आई-वियर डिवीजन भी है) का P/E Ratio लगभग 91.80x के आसपास है। अगर पूरे कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर की बात करें, तो इसका औसत P/E Ratio करीब 25.1x है। Lenskart का इतना ज्यादा प्रीमियम इसके मजबूत ग्रोथ प्रोफाइल के चलते तो ठीक है, लेकिन Citi का कहना है कि यह प्रीमियम फिलहाल थोड़ा ज्यादा लगता है।
जोखिमों पर भी Citi की पैनी नजर
Citi ने Lenskart के सामने कुछ बड़े जोखिमों को भी गिनाया है:
- सप्लाई चेन पर निर्भरता: कंपनी कच्चे माल और फ्रेम मैन्युफैक्चरिंग के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है।
- बढ़ती प्रतिस्पर्धा: ऑर्गनाइज्ड और अनऑर्गनाइज्ड दोनों ही तरह के प्लेयर्स से मुकाबला कड़ा हो रहा है।
- स्टोर इकोनॉमिक्स: स्टोर्स के मुनाफे में कमी आने का खतरा बना हुआ है।
- फ्रैंचाइजी शिकायतों का मामला: कंपनी पर फ्रैंचाइजी पार्टनर्स की ओर से गंभीर आरोप लगे हैं।
- प्रमोटर होल्डिंग: प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी कम होकर करीब 17.6% रह गई है।
- पुराने कानूनी मामले: कंपनी पर टैक्स और अन्य कानूनी मामले भी चल रहे हैं।
आगे क्या?
बाजार जानकारों के बीच Lenskart को लेकर राय बंटी हुई है। जहां Citi जैसी फर्म 'Neutral' रेटिंग दे रही है, वहीं कई अन्य एनालिस्ट्स इसे 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं और ₹485 के आसपास का एवरेज टारगेट प्राइस दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि Lenskart अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी को कैसे लागू करती है, सप्लाई चेन के जोखिमों को कैसे मैनेज करती है, और अपने महंगे वैल्यूएशन को कैसे सही ठहरा पाती है।