बजट 2026 का बाज़ार पर असर
1 फरवरी 2026, रविवार को यूनियन बजट पेश होने के बाद भारतीय शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। Sensex और Nifty, दोनों ही लगभग 2% फिसल गए। बजट में फिस्कल डेफिसिट को 4.3% पर लाने का लक्ष्य और कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) को 9% बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने जैसे सकारात्मक कदम उठाए गए थे। लेकिन, इन सबके बावजूद, ट्रेडिंग पर लगने वाले टैक्स में बढ़ोतरी और कुछ ख़ास उपायों की कमी ने निवेशकों की घबराहट बढ़ा दी। बाज़ार की इस तुरंत प्रतिक्रिया से पता चला कि निवेशक बढ़ी हुई ट्रांजेक्शन कॉस्ट को लेकर चिंतित थे [2, 4, 34]।
STT Hike और F&O सेगमेंट पर असर
बाज़ार में आई इस घबराहट की मुख्य वजह फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) का बढ़ना रहा। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से डोमेस्टिक ब्रोकरेज फर्मों पर बुरा असर पड़ सकता है और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) भी इससे दूर हो सकते हैं, क्योंकि वे अक्सर हेजिंग के लिए F&O सेगमेंट का इस्तेमाल करते हैं [16, 38]। STT की दरें फ्यूचर्स पर 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.10% से 0.15% कर दी गई हैं [16, 24]। इसे सट्टेबाजी पर लगाम लगाने और रेवेन्यू बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसने सीधे तौर पर ट्रेडिंग की लागत बढ़ा दी है। इससे इंडिया डेरिवेटिव-ओरिएंटेड फॉरेन फ्लो के लिए कम आकर्षक हो सकता है। कैपिटल फ्लो मैनेजमेंट या करेंसी स्टेबिलिटी के लिए सीधे उपायों की कमी ने भी निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव डाला [2, 5, 16, 38] $
Axis Mutual Fund के CIO, आशीष गुप्ता ने बजट को "मिला-जुला" बताया। उन्होंने टैक्स रिजीम के स्थिर रहने की सराहना की, लेकिन STT में बढ़ोतरी और बॉरोइंग प्रोग्राम से निराशा जताई। आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC के CIO – इक्विटी, हरीश कृष्णन ने बजट को यथार्थवादी और फिस्कल प्रूडेंस वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह सप्लाई-साइड कैपेक्स स्टिमुलस से हटकर डोमेस्टिक कंजम्पशन को सपोर्ट करने की ओर एक रणनीतिक बदलाव है। उन्होंने यह भी आगाह किया कि बढ़ी हुई बॉरोइंग से निकट भविष्य में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन मीडियम टर्म के लिए उम्मीदें रूढ़िवादी बनी हुई हैं [1] $
एक्सपर्ट्स की नज़रों में खास स्टॉक्स
बाज़ार में आई इस उथल-पुथल के बीच, कई एनालिस्ट्स ने ऐसे खास स्टॉक्स की पहचान की है, जिन्हें बजट के ऐलान और बड़े आर्थिक ट्रेंड्स का फायदा मिल सकता है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, AI, डिजिटल सर्विसेज और कुछ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स पर फोकस किया गया है, जो इन स्टॉक्स के लिए एक अच्छा आधार तैयार करता है।
Motilal Oswal Financial Services के सिद्धार्थ खेमका ने Apollo Hospitals Enterprises (मौजूदा भाव: ₹6,948; P/E: 59.8) को रीजनल मेडिकल टूरिज्म और 'बायोफार्मा शक्ति' मिशन से फायदा उठाने वाला बताया। Mahindra & Mahindra (मौजूदा भाव: ₹3,364; P/E: 29.4) को ₹1 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स और फार्म मैकेनाइजेशन पर लगातार फोकस से फायदा होने की उम्मीद है। Biocon (टारगेट: ₹460) से 'बायोफार्मा शक्ति' मिशन का लाभ उठाने की उम्मीद है, जो इसके डायबिटीज और ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो के अनुरूप है। वहीं, Larsen & Toubro (मौजूदा भाव: ₹3,814; P/E: 31.5) को इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट सपोर्ट और इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के रिवाइवल से फायदा होगा, साथ ही रेलवे और रोड्स के लिए कैपेक्स में बढ़ोतरी से भी लाभ मिलेगा [4, 10, 13, 31] $
Kotak Securities के श्रीकांत चौहन ने Indian Hotels Company (मौजूदा भाव: ₹664; P/E: 56.0) को हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर गिनाया, जिसे डिमांड-सप्लाई की अनुकूल स्थितियों से फायदा हो सकता है। उन्होंने Tata Consultancy Services (मौजूदा भाव: ₹3,187; P/E: 22.6) पर भी ज़ोर दिया, जो AI और बड़े डील्स पर अपने रणनीतिक फोकस के साथ, विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स हॉलिडे से लाभान्वित होगी [44] $
HDFC Securities के देवरश वकील ने 'बायोफार्मा शक्ति' प्रस्तावों और बढ़ते इंडियन CRDMO मार्केट को देखते हुए Sai Life Sciences की सिफारिश की। Syrma SGS Technology (टारगेट: ₹920) को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए बढ़े हुए आउटले, जो FY26-27 के लिए ₹40,000 करोड़ तक है, से फायदा मिलेगा। Zensar Technologies (मौजूदा भाव: ₹667; P/E: 20.0) को AI-ड्रिवन सॉल्यूशंस की ओर रणनीतिक बदलाव और बजट के 'इंटेलिजेंस-फर्स्ट' अप्रोच के साथ संरेखित होने का फायदा मिलेगा [9, 45] $
आगे की राह और सेक्टरल ट्रेंड्स
यूनियन बजट 2026-27 इंफ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। FY27 के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ा दिया गया है, जो पिछले साल के अनुमानों से 11.5% ज़्यादा है [13, 34]। इस महत्वपूर्ण आवंटन से कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में मांग बढ़ने की उम्मीद है। AI, डेटा सेंटर्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, जिसमें 2047 तक विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स हॉलिडे शामिल है, टेक्नोलॉजी को ग्रोथ इंजन के तौर पर एक रणनीतिक कदम का संकेत देता है [4, 44, 47]। हालांकि STT में बढ़ोतरी से ट्रेडिंग वॉल्यूम और FIIs की डेरिवेटिव्स में भागीदारी पर अल्पकालिक बाधाएं आती हैं, लेकिन बजट के कैपेक्स और टेक्नोलॉजी एजेंडा के साथ जुड़े सेक्टर्स के लिए लॉन्ग-टर्म आउटलुक एनालिस्ट्स के बीच सावधानी भरा आशावादी बना हुआ है।