Brent crude के भाव **$97** प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भारी दबाव है। Nifty 50 में लगातार **4** हफ्तों से गिरावट देखी जा रही है, और अब निवेशकों की नजर RBI और US Federal Reserve की अगली चाल पर टिकी है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रहा है, जिसका मुख्य कारण $97 प्रति बैरल के पास मंडराता कच्चा तेल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के डर ने घरेलू बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब बाजार की दिशा सिर्फ कंपनी के नतीजों पर नहीं, बल्कि ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट पर निर्भर हो गई है।
रुपये पर दबाव और RBI की चुनौती
महंगे तेल के आयात के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.40 से 94.50 के रेंज में आ गया है। रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए RBI को लगातार फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस स्थिति के चलते RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि उन्हें महंगाई और लिक्विडिटी के बीच तालमेल बिठाना है।
Nifty और कॉरपोरेट मुनाफे पर असर
Nifty 50 में लगातार 4 हफ्तों की गिरावट ने निवेशकों का कॉन्फिडेंस हिला दिया है। मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमर सेक्टर की कंपनियां मार्जिन प्रेशर झेल रही हैं क्योंकि बढ़ती लागत को ग्राहकों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अर्निंग ग्रोथ के अनुमानों में पहले ही कटौती की जा चुकी है, जिससे मार्केट में फ्रेश रैली के लिए कोई बड़ा ट्रिगर नहीं दिख रहा है।
Fed की बैठक और विदेशी निवेश
बाजार पर एक और बड़ा खतरा 15-16 सितंबर को होने वाली US Federal Reserve की पॉलिसी बैठक का है। अमेरिका के मजबूत रोजगार डेटा के बाद बाजार में ब्याज दरें बढ़ाने की अटकलें तेज हो गई हैं, जिससे विदेशी निवेशक (FIIs) अपना पैसा निकाल सकते हैं और वोलेटिलिटी बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना सबसे जरूरी है। अगर Brent के भाव गिरते हैं, तो रुपये को सहारा मिलेगा और RBI को पॉलिसी में थोड़ी राहत देने की जगह मिलेगी। तब तक निवेशकों को संभलकर रहने और ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स पर नजर बनाए रखने की सलाह है।
