ब्लॉक डील से मिली अल्पकालिक राहत
23 फरवरी 2026 को Cohance Lifesciences के शेयर में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लगभग 8.5% की तेजी दर्ज की गई। यह उछाल ₹331.20 के स्तर तक पहुंचा। इस तेजी की मुख्य वजह एक बड़ी ब्लॉक डील थी, जिसमें करीब 77 लाख शेयर, यानी कंपनी की 2% इक्विटी, ₹306 प्रति शेयर के औसत भाव पर ₹235.6 करोड़ में ट्रेड हुए। बाद में, शेयर 2.6% बढ़कर ₹313.50 पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी 50 की मामूली बढ़त से काफी बेहतर था। यह हालिया ब्लॉक डील पिछली सितंबर 2025 की ब्लॉक डील से अलग थी, जहां प्रमोटर की बड़ी हिस्सेदारी बिक्री के कारण शेयर 6% गिर गया था।
नतीजों में बड़ी गिरावट और चिंताएं
यह शेयर में आई उछाल फार्मा सेक्टर की मजबूत तस्वीर के बिल्कुल विपरीत है, जहाँ जनवरी 2026 में भारतीय फार्मा मार्केट (IPM) में 10.21% की सालाना ग्रोथ देखी गई। Cohance Lifesciences के हालिया नतीजे चौंकाने वाले हैं। कंपनी ने Q3 FY26 में 19.5% की गिरावट के साथ ₹544.55 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 76.1% की भारी गिरावट आई और यह ₹36.72 करोड़ पर आ गया।
नियामक मुद्दे और विश्लेषकों की राय
कंपनी की मुश्किल यहीं खत्म नहीं होती। USFDA ने Nacharam स्थित फॉर्मूलेशन फैसिलिटी को वॉर्निंग लेटर (Warning Letter) जारी किया है, जिससे शिपमेंट में देरी हो रही है और भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कंपनी ने FY26 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान को भी घटाकर 'अर्ली-to-मिड डबल-डिजिट' रेवेन्यू गिरावट की उम्मीद जताई है।
बाजार में Cohance Lifesciences का प्रदर्शन पिछले एक साल में 74.5% गिरा है, जबकि निफ्टी 50 में 13% की तेजी आई। इस दौरान Sun Pharma के शेयर 3.30% और Divi's Laboratories के 5.39% बढ़े, जबकि Torrent Pharmaceuticals 36.94% उछला।
विश्लेषकों (Analysts) की बात करें तो, भले ही उनका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹512.67 है, लेकिन कई ब्रोकर 'Buy' से 'Hold' पर डाउनग्रेड कर चुके हैं। टेक्निकल एनालिस्ट्स (Technical Analysts) शेयर पर ₹400 के स्तर के नीचे 'Sell on Rise' की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का भरोसा भी डिगा है, जिन्होंने दिसंबर 2025 तिमाही में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 6.02% कर दी है।
भविष्य की राह
Cohance Lifesciences का कहना है कि FY26 एक ट्रांजिशन ईयर है और FY27 से रेवेन्यू ग्रोथ वापस पटरी पर आ सकती है। कंपनी ने पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) जनरेट किया है। हालांकि, Nacharam फैसिलिटी के नियामकीय मुद्दों को सुलझाना और गिरते रेवेन्यू को संभालना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी।