Bernstein का भारत पर बदला नजरिया
Bernstein ने 2026 के लिए भारतीय इक्विटी बाजार पर अपने पहले के मजबूत रुख को बदलकर 'Neutral' कर दिया है। फर्म को अब बाजार से मामूली रिटर्न की उम्मीद है। उन्होंने निफ्टी (Nifty) के लिए 28,100 का टारगेट दिया है, जिससे साल के अंत तक लगभग 7.5% से 8% तक का रिटर्न मिल सकता है। इस बदले हुए नजरिए के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय शेयरों का महंगा वैल्यूएशन है। वर्तमान में, भारतीय बाजार का फॉरवर्ड पी/ई (Forward P/E) 20 के पार है, जो वैश्विक औसत 15 के मुकाबले काफी ज्यादा है।
मैक्रो इकोनॉमिक चुनौतियां और कमाई पर असर
महंगे वैल्यूएशन के अलावा, Bernstein ने कुछ बढ़ते मैक्रो इकोनॉमिक दबावों पर भी चिंता जताई है। अक्टूबर-दिसंबर 2025-26 तिमाही में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit - CAD) बढ़कर 13.2 बिलियन डॉलर यानी GDP का 1.3% हो गया है। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जो आयात लागत और महंगाई को बढ़ा रही हैं। भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.6860 के स्तर पर कमजोर हुआ है। इन वजहों से एनालिस्ट (Analysts) आने वाले समय में कमाई के अनुमानों (Earnings Estimates) में कटौती कर सकते हैं। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि यह स्थिति निफ्टी को 19,000 से 20,000 तक नीचे ला सकती है।
सेक्टरों में कहां है तेजी की उम्मीद?
इस सतर्क आर्थिक परिदृश्य के बावजूद, Bernstein ने कुछ चुनिंदा सेक्टरों में निवेश के अवसर देखे हैं।
- IT सेक्टर: फर्म का मानना है कि AI (Artificial Intelligence) के डर से IT शेयरों का वैल्यूएशन जरूरत से ज्यादा गिर गया है। वर्तमान बाजार मूल्य लंबी अवधि की ग्रोथ को केवल 5-6% के रूप में दर्शा रहा है, जिसे Bernstein काफी निराशावादी मानता है। Nifty IT इंडेक्स का P/E 20.6 है।
- फाइनेंशियल सेक्टर: यह सेक्टर फर्म की पसंद बना हुआ है, जहां हालिया सावधानीपूर्ण लेंडिंग (Lending) के कारण क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) को कम माना जा रहा है। Nifty Financial Services इंडेक्स का P/E 15.4 है, जो व्यापक बाजार की तुलना में अधिक आकर्षक है।
Bernstein ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर को भी पसंद कर रहा है और यूटिलिटीज (Utilities) को एक अच्छा डिफेंसिव (Defensive) विकल्प मानता है।
किन सेक्टर्स से रहें दूर?
Bernstein ने अत्यधिक साइक्लिकल (Cyclical) या वैश्विक रूप से अधिक जोखिम वाले सेक्टरों से सावधान रहने की सलाह दी है। फर्म का कहना है कि मिड-कैप (Mid-cap) और स्मॉल-कैप (Small-cap) शेयर, हालिया गिरावट के बावजूद, अभी भी बहुत महंगे हैं और बड़े निवेश के लिए उपयुक्त नहीं हैं।