बाजार के जानकारों का मानना है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO के आने से पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के शेयरों पर कुछ समय के लिए दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, इसे लंबे समय के निवेशकों के लिए खरीदारी का एक अच्छा मौका भी माना जा रहा है।
क्या है वजह?
मार्केट एक्सपर्ट नीरज दीवान का कहना है कि NSE के IPO के ऐलान के बाद निवेशकों का ध्यान और पैसा उस ओर जा सकता है। ऐसे में, BSE जैसी लिस्टेड एक्सचेंज कंपनियों पर अल्पावधि के लिए थोड़ा प्रेशर आ सकता है। जब कोई बड़ी कंपनी IPO लाती है, तो बाजार की नजरें उस पर टिक जाती हैं और फंड का फ्लो भी उधर शिफ्ट हो सकता है, जिससे मौजूदा कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अगर BSE के शेयर 10% से 15% तक गिरते हैं, तो यह लंबे समय के निवेशकों के लिए एक बढ़िया एंट्री पॉइंट साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSE का IPO पूरे एक्सचेंज सेक्टर के लिए एक नया बेंचमार्क तय करेगा, जिससे BSE के वैल्यूएशन को समझने में आसानी होगी।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
इसके अलावा, कच्चे तेल की गिरती कीमतों को भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए जब तेल की कीमतें गिरती हैं, तो इंपोर्ट का खर्च कम होता है और महंगाई को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय इक्विटी मार्केट में भरोसा बढ़ता है, जो बाजार को सपोर्ट करता है।
सेक्टर आउटलुक और जोखिम
फाइनेंशियल और डिफेंस जैसे सेक्टर में लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावनाएं बनी हुई हैं। लेकिन, निवेशकों को बाजार की वोलेटिलिटी (Volatility) और ग्लोबल फैक्टर जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के फैसले और महंगाई के आंकड़ों पर भी नजर रखनी चाहिए। एक्सचेंज कंपनियों का प्रदर्शन ट्रेडिंग वॉल्यूम और रेगुलेटरी माहौल पर भी निर्भर करता है।
