भारतीय मार्केट के दिग्गज शेयरों (Bluechip Stocks) की चमक थोड़ी फीकी पड़ती दिख रही है। पिछले एक साल में Sensex में **6.8%** की गिरावट के साथ कई बड़े शेयर अपने ऐतिहासिक औसत से काफी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।
पिछले 12 महीनों में BSE Sensex के वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट देखी गई है, जो 74,782 के स्तर पर बंद हुआ। यह पिछले साल की तुलना में 6.8% की गिरावट को दर्शाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्केट का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 10.8% घटकर 19.8x रह गया है, जो 2020 के मध्य की स्थिति जैसा है। यह संकेत देता है कि निवेशक अब बड़ी कंपनियों की भविष्य की ग्रोथ पर कम भरोसा जता रहे हैं।
सस्ते मिल रहे हैं दिग्गज शेयर
यह गिरावट काफी व्यापक है। HDFC Bank का प्राइस-टू-बुक वैल्यू (P/BV) अपने पांच साल के औसत से 36% नीचे है। इसी तरह, SBI Cards का वैल्यूएशन अपने लॉन्ग-टर्म औसत 7.24x से 45% के डिस्काउंट पर मिल रहा है। HDFC Life Insurance और Ambuja Cements जैसे नाम भी अपने पुराने मानकों से काफी सस्ते भाव पर ट्रेड कर रहे हैं।
क्या है गिरावट की असली वजह?
निवेशकों को यह समझना होगा कि क्या शेयर सस्ता होने के पीछे सिर्फ मार्केट का सेंटीमेंट है या फंडामेंटल बदलाव। कई कंपनियां ऑपरेटिंग दिक्कतों से जूझ रही हैं:
- Infosys: कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस घटाकर 1.5%-3.0% कर दिया है।
- Havells: इनपुट कॉस्ट बढ़ने का दबाव साफ दिख रहा है।
- Dabur: कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में सुस्ती और भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
सावधानी जरूरी
सस्ता शेयर मिलना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। उदाहरण के तौर पर Avenue Supermarts का P/E अभी भी 78.5x पर बना हुआ है, जबकि यह क्विक-कॉमर्स के दबाव और बिल-साइज में कमी से जूझ रही है। बाजार सिर्फ उन्हीं कंपनियों को प्रीमियम दे रहा है जिनकी अर्निंग विजिबिलिटी साफ है। आने वाले समय में मार्जिन में सुधार और प्रॉफिट ग्रोथ ही तय करेगी कि यह वैल्यूएशन गिरावट निवेश का मौका है या एक चेतावनी।
