INVasset PMS के पार्टनर Anirudh Garg का मानना है कि प्रिसिजन इंजीनियरिंग और डिजिटल फाइनेंस प्लेटफॉर्म लंबी अवधि के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, लेकिन क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए बड़ा रिस्क बनी हुई हैं।
मैन्युफैक्चरिंग में नया बदलाव
निवेशक अब ऐसी कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं जिन्होंने साधारण ऑटो पार्ट्स से आगे बढ़कर 'प्रिसिजन इंजीनियरिंग' में अपनी जगह बनाई है। INVasset PMS के पार्टनर Anirudh Garg के मुताबिक, भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। डिफेंस, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV कंपोनेंट्स में कदम रखने वाली कंपनियां अब घरेलू ऑटो साइकिल पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं। यह रणनीति न केवल उन्हें ग्लोबल क्लाइंट्स दिला रही है, बल्कि चीन से सप्लाई चेन शिफ्ट होने का भी फायदा मिल रहा है।
डिजिटल फाइनेंस का बढ़ता दायरा
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेचना एक स्ट्रक्चरल ग्रोथ थीम बन गया है। SIP और नए डीमैट अकाउंट्स के बढ़ते चलन से इन कंपनियों को 'ऑपरेटिंग लेवरेज' का लाभ मिल रहा है। हालांकि, इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (CAC) को कितना कंट्रोल कर पाते हैं।
बैंकिंग और मेटल सेक्टर की नई रणनीति
बैंकिंग सेक्टर में अब लोन ग्रोथ से ज्यादा फोकस डिपॉजिट जुटाने (Liability Management) पर है। Anirudh Garg का मानना है कि जिन बैंकों के पास मजबूत डिपॉजिट फ्रेंचाइजी है, वे बेहतर स्थिति में हैं। वहीं, मेटल सेक्टर में स्टील के बजाय कॉपर और एल्युमिनियम जैसे नॉन-फेरस मेटल्स को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी ट्रांजिशन में इनकी डिमांड काफी स्टेबल है।
क्रूड ऑयल का खतरा
बाजार फिलहाल रेंज-बाउंड स्थिति में है। जहां डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स बाजार को सहारा दे रहे हैं, वहीं विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली दबाव बना रही है। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इंपोर्ट करता है, ऐसे में क्रूड के ऊंचे दाम करंट अकाउंट डेफिसिट और रुपये पर दबाव डाल सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनियों के अर्निंग क्वालिटी और इनपुट कॉस्ट मैनेजमेंट पर कड़ी नजर रखें।
