मार्केट एक्सपर्ट्स अब Aerospace, Power और Semiconductor सेक्टर पर दांव लगा रहे हैं। Nifty 500 की कंपनियों का अर्निंग्स अनुमान **19%** ऊपर रहने की उम्मीद है, जो इन सेक्टरों को लंबी अवधि के लिए मजबूत आधार दे रहा है।
भारतीय बाजार अब रिकवरी के दौर से निकलकर औद्योगिक क्षमता (Industrial Capacity) को बढ़ाने की दिशा में बढ़ रहा है। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, Nifty 500 इंडेक्स की अर्निंग्स में सालाना आधार पर 19% की वृद्धि का अनुमान है, जो उतार-चढ़ाव के बीच एक मजबूत फंडामेंटल सपोर्ट दे रहा है।
एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ता भरोसा
Global Aviation इंडस्ट्री में डिमांड-सप्लाई के अंतर के कारण एयरोस्पेस सेक्टर एक 'हाई-कनविक्शन' थीम बनकर उभरा है। Airbus और Boeing जैसे बड़े दिग्गजों के लिए भारतीय कंपनियां अब पसंदीदा पार्टनर बन रही हैं, खासकर जिनके पास NADCAP और AS9100 जैसे ग्लोबल सर्टिफिकेशन्स हैं। निवेशकों के लिए इन कंपनियों के लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स भविष्य की कमाई का पक्का जरिया हैं, लेकिन इसमें सफल होने के लिए कंपनी की कार्यक्षमता (Execution) और ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पालन करना बेहद जरूरी है।
पावर और चिप मैन्युफैक्चरिंग का कायापलट
पावर सेक्टर में ₹1.86 लाख करोड़ के ग्रिड कॉरिडोर प्रोजेक्ट और 700 GW के ग्रीन एनर्जी लक्ष्य ने निवेश की दिशा बदल दी है। अब बिजली के उपकरणों की डिमांड केवल कैपेसिटी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा सेंटर और रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन से भी जुड़ी है। वहीं दूसरी ओर, सरकार का ₹1.64 लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर मिशन देश में Wafer प्रोडक्शन, OSAT और PCB असेंबली का इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।
मार्केट रिस्क और सावधानी
निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सेमीकंडक्टर जैसे कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स में मुनाफा शुरू होने में काफी लंबा समय लगता है। भले ही ऑर्डर बुक शानदार दिख रही हो, लेकिन असल कमाई कंपनी के कॉस्ट मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट की समय पर डिलीवरी पर निर्भर करेगी। फिलहाल, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और SIP के जरिए आ रहा पैसा बाजार को सहारा दे रहा है। निवेशकों को आने वाले समय में ऑर्डर एग्जीक्यूशन रेट और सरकारी नीतियों पर खास नजर रखनी चाहिए।
