अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, Adani Group को मिली राहत
अमेरिका के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा दायर शेयर धोखाधड़ी के मुकदमे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस मामले में अमेरिका का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) नहीं बनता है और कथित रिश्वतखोरी (bribery) जैसी योजनाओं के लिए अमेरिकी कानूनों को दूसरे देशों में लागू करना अनुचित है। इस फैसले ने Adani Group के शेयरों पर लंबे समय से चले आ रहे कानूनी दबाव को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे निवेशकों की धारणा (investor sentiment) में सुधार हुआ है।
प्रमुख शेयरों में दमदार उछाल
इस खबर के आते ही Adani Group की सबसे बड़ी कंपनी Adani Enterprises के शेयरों में 9% से ज्यादा की तेजी देखी गई और यह ₹2,099 के स्तर पर पहुंच गया। Adani Green Energy के शेयर 8% से अधिक बढ़कर ₹1,003 पर कारोबार कर रहे थे, जबकि Adani Ports में 7% से अधिक का उछाल आया और यह ₹1,473 पर पहुंच गया। इसके अलावा, Ambuja Cements, Adani Total Gas, Adani Power, ACC और Orient Cement सहित ग्रुप की अन्य कंपनियों के शेयरों में भी 3% से लेकर 7% तक की बढ़त दर्ज की गई।
वैल्यूएशन और कर्ज की चिंताएं बरकरार
हालांकि, यह कानूनी जीत Adani Group के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन कंपनी के शेयरों के वैल्यूएशन (valuation) को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, Adani Enterprises का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 40x है, जो भारतीय कंपनियों के लिए सामान्य 20-35x P/E रेशियो से काफी ज्यादा है। साथ ही, Adani Group पर लगभग 2.5x के कर्ज-से-इक्विटी (debt-to-equity) रेशियो के साथ एक बड़ा डेट लोड (debt load) भी है, जो कि कई दूसरे प्रमुख खिलाड़ियों से अधिक है।
इंडस्ट्री दबाव और भविष्य की राह
Adani Group जिस इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में काम करता है, वह वर्तमान में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ती ब्याज दरों से जूझ रहा है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करना अधिक महंगा हो गया है। SEC केस का खारिज होना Adani Group को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन कंपनी को अपने बड़े कर्ज को कम करने और लगातार कैश फ्लो (cash flow) बनाने की अपनी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। कई विश्लेषकों (analysts) ने इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है और ज्यादातर ने 'होल्ड' या 'न्यूट्रल' रेटिंग बनाए रखी है। भविष्य में, मैनेजमेंट द्वारा जटिल नियमों और कर्ज को संभालने की क्षमता पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।