AI की धमक से ग्लोबल मार्केट में रौनक, टेक शेयरों में तूफानी तेजी
10 फरवरी 2026 को ग्लोबल इक्विटी मार्केट में शानदार तेजी देखी गई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित टेक्नोलॉजी शेयरों में आई मजबूत रिकवरी ने बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। अमेरिका में, S&P 500 अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि Nasdaq Composite में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। Nvidia और Broadcom जैसी कंपनियों ने AI-आधारित इनोवेशन में निवेशकों का भरोसा फिर से जगाया। Dow Jones Industrial Average ने तो नया ऑल-टाइम हाई (record high) बना दिया, जो एक व्यापक, लेकिन चुनिंदा तौर पर टेक-केंद्रित, बाजार की रिकवरी को दर्शाता है।
एशियाई बाजारों में भी यही सकारात्मक माहौल दिखा। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स रिकॉर्ड नए स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह प्रधानमंत्री Sanae Takaichi की प्रचंड बहुमत वाली जीत रही, जिनसे बाजार-अनुकूल नीतियों की उम्मीद जगी है। साउथ कोरिया का Kospi भी बढ़त पर कारोबार कर रहा था। भारत में, GIFT Nifty फ्यूचर्स ने घरेलू इंडेक्स के लिए मजबूत शुरुआत का संकेत दिया, जिसका श्रेय फ्रंटलाइन शेयरों की मजबूती और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे पर बनी उम्मीदों को जाता है। Nifty 50 और BSE Sensex 9 फरवरी 2026 को भी बढ़त के साथ बंद हुए थे, जो बाजार के सकारात्मक रुझान को दर्शाता है।
कमोडिटी मार्केट में अलग-अलग चाल: चांदी चमकी, सोना शांत, तेल पर मंदी
कमोडिटी मार्केट में मिली-जुली तस्वीर दिखी। चांदी की कीमतों में जबरदस्त मजबूती देखी गई, जिसमें शानदार तेजी आई। MCX पर चांदी फ्यूचर्स में बढ़ोतरी हुई, खुदरा कीमतें ₹3 लाख प्रति किलोग्राम के पार कर गईं, जो एक उल्लेखनीय रिकवरी का संकेत है। ऐसा लगता है कि सट्टेबाजों और औद्योगिक मांग दोनों का गठजोड़ कीमतों को बढ़ा रहा है। हालांकि, सोने के भाव में सिर्फ मामूली बढ़त देखी गई, भारत में 24-कैरेट सोने का भाव लगभग ₹158,360 प्रति 10 ग्राम रहा। सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन चांदी की तुलना में इसकी फीकी परफॉरमेंस बताती है कि बाजार के कारक अलग-अलग हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई। 10 फरवरी 2026 को WTI क्रूड करीब $64.10 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड $68.66 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, लंबी अवधि का आउटलुक मंदी वाला बना हुआ है। U.S. Energy Information Administration (EIA) ने 2026 के लिए ग्लोबल तेल कीमतों में गिरावट का अनुमान लगाया है, जिसमें WTI का औसत दाम $52.21 प्रति बैरल रहने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण 2026 में ग्लोबल उत्पादन की मांग से अधिक होने का अनुमान है।
बाजार की तेजी की वजहें: AI नैरेटिव और ट्रेड डील का असर
बाजार में मौजूदा तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ टेक्नोलॉजी सेक्टर में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की कहानी का है, जिसने अमेरिका के प्रमुख टेक इंडेक्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। यह चुनिंदा तेजी दिखाती है कि ग्रोथ-उन्मुख टेक्नोलॉजी शेयरों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य सेक्टर अलग-अलग आर्थिक दबावों का सामना कर रहे हैं। भारतीय बाजार में सकारात्मक भावना को हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे से और भी बल मिला है, जिसका मकसद टैरिफ को लेकर अनिश्चितताओं को दूर करना और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है। यह एक ऐसा विकास है जो एक साल पहले के बाजार हालात से काफी अलग है।
फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भारतीय शेयरों में खरीदारी में नई रुचि दिखाई है, 9 फरवरी 2026 को उन्होंने ₹2,254.64 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। लगातार बिकवाली के दबाव से यह बदलाव, भारतीय रुपये के स्थिरीकरण और मजबूती से भी जुड़ा है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा जोखिम कम हुआ है। जापान के Nikkei 225 के रिकॉर्ड प्रदर्शन का सीधा संबंध प्रधानमंत्री Takaichi की जीत के बाद राजनीतिक स्थिरता से है, जिससे बाजार को विकास-उन्मुख आर्थिक नीतियों और राजकोषीय प्रोत्साहन की उम्मीद है।
चिंताएं भी बनी हुई हैं: वैल्यूएशन का बोझ और आर्थिक डेटा का इम्तहान
तेजी की गति के बावजूद, महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। AI-केंद्रित टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेज उछाल ने संभावित तौर पर बढ़ी हुई वैल्यूएशन (inflated valuations) के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की अवधि के बाद। ट्रेडर्स इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या मौजूदा रिकवरी टिकाऊ मूल्य निर्माण को दर्शाती है या केवल अल्पकालिक पोजिशनिंग का नतीजा है। चांदी की नाटकीय उछाल और सोने की धीमी बढ़त के बीच का अंतर, पहले वाले में सट्टेबाजी वाले जोश का संकेत दे सकता है, जिससे यह तेज गिरावट के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
इसके अलावा, अमेरिका में आने वाले आर्थिक डेटा, जैसे कि रोजगार और महंगाई के आंकड़े, अगर उम्मीदों से काफी अलग रहे तो अस्थिरता पैदा कर सकते हैं, जो फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। EIA द्वारा 2026 के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का अनुमान, मौजूदा मूल्य वृद्धि के विपरीत, ऊर्जा क्षेत्र और संबंधित अर्थव्यवस्थाओं के लिए संभावित हेडविंड (चुनौतियाँ) का संकेत देता है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव कुछ हद तक कम हुए हैं, लेकिन व्यापक वैश्विक अनिश्चितताएं बाजार की स्थिरता के लिए एक अंतर्निहित जोखिम बनी हुई हैं।
आगे क्या? सतर्क उम्मीद और सेक्टर-विशिष्ट रणनीति
विश्लेषकों का निकट भविष्य के लिए, खासकर भारतीय बाजारों के लिए, एक सतर्क आशावादी दृष्टिकोण है, कुछ का सुझाव है कि Nifty 26,000 के आसपास के ऊपरी स्तरों का परीक्षण कर सकता है। हालांकि, एक प्रमुख भावना स्टॉक-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाने की है, उन कंपनियों पर जोर दिया जा रहा है जो क्षेत्रीय ताकत और भारत-अमेरिका व्यापार सौदे जैसे चल रहे आर्थिक विकास से लाभान्वित होने के लिए तैयार हैं। टेक रैली की स्थिरता AI एकीकरण के वास्तविक प्रभाव और भविष्य की आय रिपोर्टों पर निर्भर करेगी। इसके विपरीत, ऊर्जा बाजार संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें अगले वर्ष कीमतों में और गिरावट की उम्मीद है, जो तेल-निर्भर क्षेत्रों से बाजार नेतृत्व में संभावित बदलाव का संकेत देता है। निवेशक आर्थिक डेटा के एक महत्वपूर्ण सप्ताह की तैयारी कर रहे हैं, जो वैश्विक बाजारों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों की दिशा तय कर सकते हैं।