AI का बंटा हुआ खेल: IT चिंतित, Financials आशावान
Axis Mutual Fund के हेड ऑफ इक्विटी, श्रेयस देवलकर का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर भारतीय वित्तीय इकोसिस्टम पर अलग-अलग हो रहा है। जहाँ IT सर्विसेज सेक्टर AI टूल्स से होने वाली रेवेन्यू में कमी और बिजनेस मॉडल में बड़े बदलावों के डर से जूझ रहा है, वहीं Financial Services सेक्टर कुशलता बढ़ाने और जोखिमों को संभालने के लिए AI को सावधानी से अपना रहा है। यह अंतर निवेशकों की भावना को बदल रहा है और सेक्टर के वैल्यूएशन को प्रभावित कर रहा है।
IT सेक्टर पर AI का साया
खासकर फरवरी 2026 की शुरुआत में Anthropic और Palantir जैसी कंपनियों द्वारा एडवांस्ड AI टूल्स के लॉन्च के बाद से भारतीय IT स्टॉक्स में भारी गिरावट आई है। Nifty IT इंडेक्स में लगभग 8% की तेज गिरावट देखी गई, जिससे कुछ ही सत्रों में करीब ₹2.5 लाख करोड़ का मार्केट कैप साफ हो गया। चिंताएं बढ़ रही हैं कि AI, IT सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा किए जाने वाले बड़े काम को ऑटोमेट कर सकता है, जिससे रेवेन्यू कम हो सकता है और इंडस्ट्री के लेबर-इंटेंसिव मॉडल में बड़ा बदलाव आ सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले चार सालों में IT सर्विसेज रेवेन्यू का 9-12% हिस्सा AI की वजह से खत्म हो सकता है। Infosys, TCS, Wipro और HCL Technologies जैसे प्रमुख IT दिग्गजों, जिनके शेयर आमतौर पर 17x से 26x के P/E मल्टीपल पर ट्रेड करते हैं, अब निवेशकों की कड़ी जांच का सामना कर रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बिकवाली थोड़ी ज्यादा है, जबकि अन्य वैल्यूएशन के लिए बड़े डाउनसाइड जोखिमों की चेतावनी दे रहे हैं। हालांकि, इस सेक्टर का ओवरऑल ग्रोथ अनुमान मजबूत है, जिसमें डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड एडॉप्शन से भारत IT सर्विसेज मार्केट 2034 तक 78.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
Financial Services: AI की सतर्क चाल
IT सेक्टर की चिंता के विपरीत, भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर AI को सक्रिय रूप से एक्सप्लोर कर रहा है, लेकिन कड़े रेगुलेटरी नियमों के कारण अधिक संतुलित तरीके से। AI का इस्तेमाल कस्टमर एंगेजमेंट बढ़ाने, ऑपरेशन को ऑप्टिमाइज़ करने, फ्रॉड डिटेक्शन में सुधार करने और रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। भारतीय वित्तीय संस्थान AI सॉल्यूशंस में निवेश कर रहे हैं, और उनके संचालन का एक बड़ा हिस्सा प्रोडक्टिविटी बूस्ट से लाभान्वित हो सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) जैसे रेगुलेटर डेटा प्राइवेसी, अकाउंटेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक जिम्मेदार AI फ्रेमवर्क को आकार दे रहे हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर के लिए P/E मल्टीपल, जहाँ Nifty Financial Services इंडेक्स लगभग 18-18.5x पर ट्रेड कर रहा है, आमतौर पर IT सेक्टर से कम हैं। HDFC Bank ( 18.5-20.5x), ICICI Bank ( 18-19x), और Axis Bank ( 14.5-16x ) जैसे प्रमुख बैंक इस इंटीग्रेशन को नेविगेट कर रहे हैं, जिसमें कंप्लायंस और रिस्क मिटिगेशन पर ध्यान दिया जा रहा है। Axis Mutual Fund का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2025 के अंत तक लगभग ₹3.65 लाख करोड़ (करीब 44 बिलियन डॉलर) तक पहुँच गया, जो इस सेक्टर की मजबूत ग्रोथ को दर्शाता है।
एसेट एलोकेशन: अस्थिरता में Gold की स्थिरता
एसेट एलोकेशन के मामले में निवेशकों की भावना स्थिरता के पक्ष में दिख रही है। गोल्ड (Gold) की कीमतें लगातार इन्फ्लेशन कंसर्न, जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन और बड़े सेंट्रल बैंक की खरीद के कारण मजबूत बनी हुई हैं, जो एक स्ट्रक्चरल डिमांड फ्लोर के तौर पर काम कर रही हैं। अनुमान है कि 2026 में गोल्ड में स्थिर ग्रोथ देखने को मिलेगी, और कीमतें $2,300-$2,600 के दायरे में ट्रेड कर सकती हैं। इसके विपरीत, सिल्वर (Silver) में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसका कारण इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन (सोलर, EVs) और इन्वेस्टमेंट दोनों से इसकी डबल डिमांड के साथ-साथ सप्लाई डेफिसिट है।
ऑटो सेक्टर पर क्या है राय?
ऑटो सेक्टर पर श्रेयस देवलकर का सकारात्मक नजरिया बरकरार है, जो विभिन्न वाहन सेगमेंट में डिमांड में सुधार और एक्टिव प्रोडक्ट साइकल्स से प्रेरित है। हालांकि, कमोडिटी प्राइस में उतार-चढ़ाव और इंपोर्टेड वाहनों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसे संभावित जोखिम बने हुए हैं, जिन पर निवेशक लगातार नजर रख रहे हैं।
क्यों हैं IT स्टॉक्स पर दबाव?
IT सेक्टर के लिए मुख्य चिंता AI-संचालित ऑटोमेशन से हाई-मार्जिन एप्लीकेशन सर्विसेज रेवेन्यू में कमी आने की संभावना है, जो उनके बिज़नेस का बड़ा हिस्सा (40-70%) है। इससे पारंपरिक सर्विसेज पर क्लाइंट खर्च कम हो सकता है। कंपनियां AI री-स्किलिंग में निवेश कर रही हैं, लेकिन भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए AI-आधारित नई सर्विसेज विकसित करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। 2025 में ग्लोबल टेक खर्च में आई कमी ने भी सेक्टर के ग्रोथ आउटलुक पर दबाव डाला है।
फाइनेंशियल सर्विसेज और प्रीशियस मेटल्स के जोखिम
AI की क्षमता के बावजूद, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर को महत्वपूर्ण रेगुलेटरी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। डेटा प्राइवेसी, AI मॉडल बायस, ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी से जुड़ी चिंताओं के कारण AI इंटीग्रेशन की गति धीमी हो सकती है। सिल्वर में हाई वोलेटिलिटी का जोखिम है; यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेज मंदी आती है, तो इंडस्ट्रियल डिमांड कम हो सकती है। गोल्ड के लिए, हालांकि लंबी अवधि का आउटलुक पॉजिटिव है, लेकिन सेंट्रल बैंक की खरीद पैटर्न में बदलाव या अमेरिकी मौद्रिक नीति में अप्रत्याशित बदलावों से शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी आ सकती है।
आगे क्या?
IT सेक्टर के लिए AI-संचालित ऑटोमेशन के अनुकूल ढलने और अपने वर्कफोर्स को री-स्किल करने की क्षमता सर्वोपरि होगी। एनालिस्ट उन कंपनियों पर नजर रख रहे हैं जो AI-सेंट्रिक सर्विसेज पेश करने में सफल हो सकती हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज में, रेगुलेटरी माहौल AI इंटीग्रेशन की गति और गहराई तय करेगा। गोल्ड की कीमतों के लिए सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी से सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि सिल्वर की चाल इंडस्ट्रियल डिमांड, सप्लाई डायनामिक्स और व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक स्थितियों के मेल पर निर्भर करेगी।