क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto ने अपने IPO प्लान को फिलहाल टाल दिया है। कंपनी अब प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए लगभग ₹1,000 करोड़ जुटाने पर फोकस कर रही है, जिसकी वैल्यूएशन $4.5 बिलियन तय की गई है। यह कंपनी की पिछली $7 बिलियन की वैल्यूएशन से काफी कम है।
IPO की जगह प्राइवेट प्लेसमेंट का फैसला
क्विक-कॉमर्स स्टार्टअप Zepto ने अब अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) यानी शेयर बाजार में लिस्ट होने की योजना फिलहाल रोक दी है। कंपनी ने इसके बजाय प्री-IPO प्राइवेट फंडिंग राउंड के जरिए लगभग ₹1,000 करोड़ जुटाने का फैसला किया है। इस डील के लिए कंपनी ने अपनी वैल्यूएशन लगभग $4.5 बिलियन रखी है। यह पिछले अक्टूबर 2025 में हुई फंडिंग राउंड की $7 बिलियन की वैल्यूएशन से काफी कम है।
निवेशकों की चिंता और वैल्यूएशन में गिरावट
पब्लिक लिस्टिंग की जगह प्राइवेट प्लेसमेंट की ओर मुड़ने का यह फैसला डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (जैसे म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियां) के बदलते सेंटीमेंट को दर्शाता है। शुरुआती IPO चर्चाओं के दौरान, इन निवेशकों ने वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई थी और $2.5 बिलियन से $3.5 बिलियन के बीच वैल्यूएशन का सुझाव दिया था। प्राइवेट मार्केट की उम्मीदों और पब्लिक मार्केट की मांग में इस अंतर के कारण कंपनी को अपनी लिस्टिंग की राह पर फिर से विचार करना पड़ा।
कंपनी की मजबूत लिक्विडिटी पोजीशन
वैल्यूएशन में नरमी के बावजूद, Zepto की लिक्विडिटी पोजीशन मजबूत बनी हुई है। 31 मार्च, 2026 तक, कंपनी के पास ₹5,681 करोड़ का कैश रिजर्व था और कंपनी पर कोई कर्ज नहीं था (जीरो डेट)। हालांकि, निवेशकों के लिए मुख्य चिंता कंपनी का हाई कैश बर्न रेट है, जो इस गलाकाट कॉम्पिटिशन वाले क्विक-कॉमर्स सेक्टर में आम है। निवेशक अब सिर्फ ग्रोथ के आंकड़ों के बजाय यूनिट इकोनॉमिक्स और सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
मूल रूप से जुलाई 2026 में प्लान किया गया IPO अब टल गया है, और कंपनी 2027 की शुरुआत में लिस्टिंग की ओर देख रही है। Zepto को तुरंत नया ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करने की आवश्यकता नहीं है और यह नवंबर 2027 तक लिस्टिंग के लिए रेगुलेटरी टाइमलाइन के अंदर है। इस अतिरिक्त समय से कंपनी को अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा।
बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है, और स्थापित खिलाड़ी लगातार प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल रहे हैं। भविष्य में, कंपनी की वित्तीय अनुशासन में सुधार दिखाने और कड़ी प्रतिस्पर्धा से निपटने की क्षमता ही मुख्य कारक होंगे जो यह तय करेंगे कि जब वह अंततः अपने IPO प्लान पर वापस लौटेगी तो निवेशकों का विश्वास कितना बना रहेगा।
