क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने अपना IPO टाल दिया है। कंपनी अब अगले 9 महीनों में प्राइवेट फंडिंग के जरिए लगभग $105 मिलियन (लगभग ₹1000 करोड़) जुटाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह फैसला तब आया है जब कंपनी का वैल्यूएशन घटकर $4.5 बिलियन रह गया है, जो पहले $7 बिलियन था।
Zepto का IPO प्लान स्थगित
क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को फिलहाल टालने का फैसला किया है। कंपनी अब अगले दो से तीन तिमाहियों तक पब्लिक मार्केट में लिस्टिंग के बजाय प्राइवेट फंडिंग पर फोकस करेगी। Zepto का लक्ष्य अब लगभग ₹1,000 करोड़, यानी $105 मिलियन जुटाना है। पहले कंपनी ने जुलाई 2026 तक IPO लाने की योजना बनाई थी।
वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट
इस फैसले के साथ ही Zepto के वैल्यूएशन में भी बड़ी गिरावट आई है। पहले जहां कंपनी का वैल्यूएशन $7 बिलियन था, वहीं अब यह फंड जुटाने के लिए $4 बिलियन से $4.5 बिलियन के बीच वैल्यूएशन मांग रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घरेलू निवेशकों ने पब्लिक मार्केट में चर्चाओं के दौरान कंपनी को $2.5 बिलियन से $3.5 बिलियन के बीच आंका था। कंपनी का मूल लक्ष्य IPO के जरिए ₹8,010 करोड़ जुटाना था, जिसे फिलहाल रोक दिया गया है।
कैश की स्थिति और वित्तीय प्रदर्शन
IPO में देरी के बावजूद, Zepto के पास अच्छी खासी नकदी है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास ₹5,681 करोड़ कैश था और उस पर कोई कर्ज नहीं था। यह लिक्विडिटी कंपनी को अपने विस्तार में मदद करेगी। हालांकि, वित्तीय दबाव एक महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। 2026 के फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को ₹5,905 करोड़ का घाटा हुआ था। BofA Securities के अनुमान के अनुसार, वर्तमान खर्च के हिसाब से कंपनी के पास लगभग नौ महीने का रनवे था, जो कि बैलेंस शीट को मजबूत करने के कंपनी के फैसले के अनुरूप है।
क्विक कॉमर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। Amazon और Flipkart जैसी बड़ी रिटेल कंपनियां तेजी से अपनी डिलीवरी सेवाओं का विस्तार कर रही हैं। इन बड़ी कंपनियों के प्रवेश से स्पेशलाइज्ड क्विक कॉमर्स स्टार्टअप्स की लाभप्रदता और बाजार हिस्सेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। निवेशक यह देखेंगे कि Zepto इस नई पूंजी का उपयोग कैसे करता है और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने घाटे को कम करते हुए विकास कैसे बनाए रखता है।
