Startup Funding: कहीं खाली न हो जाए तिजोरी! इन वजहों से सीनियर हायरिंग बिगाड़ सकती है आपका कैश फ्लो

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AuthorAditya Rao|Published at:
Startup Funding: कहीं खाली न हो जाए तिजोरी! इन वजहों से सीनियर हायरिंग बिगाड़ सकती है आपका कैश फ्लो

स्टार्टअप फाउंडर प्रवीण लाघाटे ने चेताया है कि ज़रूरत से पहले महंगे सीनियर एग्जीक्यूटिव्स, जैसे CMOs को हायर करने से कंपनी का कैश रिजर्व तेज़ी से खत्म हो सकता है। यह आदत सही ग्रोथ और वैल्यू दिए बिना ही भारी खर्चा करवा देती है।

क्यों बनती है ये गलती?

भारत में तेज़ी से बढ़ते हुए स्टार्टअप्स के लिए एक आम जाल है - कॉर्पोरेट स्टाइल लीडरशिप टीम को समय से पहले बनाने की चाहत। हाल ही में, एंटरप्रेन्योर प्रवीण लाघाटे ने इस स्ट्रैटेजी के खतरों पर रोशनी डाली। उन्होंने एक ऐसे स्टार्टअप का उदाहरण दिया जिसने एक चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के लिए सिर्फ आठ महीनों में 50 लाख रुपये से ज़्यादा खर्च कर दिए, जबकि वह एग्जीक्यूटिव इतनी जल्दी छोड़कर चला गया। यह मामला उन फाउंडर्स के लिए एक चेतावनी है जो सीमित पूंजी के साथ बिज़नेस चला रहे हैं।

प्रीमैच्योर एग्जीक्यूटिव हायरिंग का खर्चा

जब स्टार्टअप्स किसी खास मैच्योरिटी लेवल तक पहुंचने से पहले ही सीनियर एग्जीक्यूटिव्स को हायर कर लेते हैं, तो इसका सीधा असर उनके बैलेंस शीट पर पड़ता है। इन रोल्स के साथ अक्सर भारी फिक्स्ड सैलरी और इक्विटी ग्रांट्स जुड़े होते हैं, जो कैश फ्लो पर भारी दबाव डालते हैं। जब बिज़नेस के पास ऐसे महंगे रोल को सपोर्ट करने के लिए पर्याप्त स्केल नहीं होता, तो एग्जीक्यूटिव की हाई-लेवल स्ट्रैटेजी रोज़मर्रा के ऑपरेशन्स में तब्दील नहीं हो पाती। नतीजा यह होता है कि कंपनी टॉप-टियर टैलेंट पर भारी खर्च करती है, जबकि वह बेसिक प्रोडक्ट-मार्केट फिट या ज़रूरी एग्जीक्यूशन टास्क्स से जूझ रही होती है।

लीडरशिप को बिज़नेस की मैच्योरिटी से जोड़ना

फाइनेंशियल डिसिप्लिन के लिए ज़रूरी है कि लीडरशिप एक्सपेंशन कंक्रीट माइलस्टोन्स से जुड़ा हो, न कि सिर्फ एक एस्टैब्लिश्ड फर्म की तरह दिखने की चाहत से। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीनियर हायरिंग तभी होनी चाहिए जब बिज़नेस में कॉम्प्लेक्सिटी के स्पष्ट संकेत मिलें। जैसे, जब मौजूदा मैनेजमेंट रोज़मर्रा के फैसलों की मात्रा को संभाल न पाए, जब क्रॉस-फंक्शनल टीम कोऑर्डिनेशन के लिए स्पेशलाइज्ड ओवरसाइट की ज़रूरत हो, या जब बिज़नेस को किसी नए सेगमेंट में पिवट करने की ज़रूरत हो जिसे मौजूदा टीम सपोर्ट न कर सके। इन ट्रिगर्स के बिना, एक सीनियर हायरिंग अंडरयूटिलाइज्ड एसेट बन सकता है, जो एफिशिएंसी बढ़ाने के बजाय ज़्यादा प्रोसेस कॉम्प्लेक्सिटी पैदा करता है।

इन्वेस्टर्स के लिए रिस्क और मॉनिटर करने योग्य बातें

इन्वेस्टर्स के लिए, कंपनी की हायरिंग स्ट्रैटेजी मैनेजमेंट की क्वालिटी और कैपिटल एलोकेशन का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है। 'वैनिटी हायरिंग' (सिर्फ रेपुटेशन के लिए महंगे टैलेंट को लाना) की वजह से होने वाला हाई बर्न रेट अक्सर यूनिट इकोनॉमिक्स पर फोकस की कमी का संकेत देता है। इन्वेस्टर्स को यह देखना चाहिए कि क्या कंपनी का लीडरशिप पेरोल उसके रेवेन्यू या कस्टमर बेस से तेज़ी से बढ़ रहा है। एक सस्टेनेबल अप्रोच में कंसल्टेंट्स या मिड-लेवल मैनेजर्स का उपयोग करना शामिल है जो टैक्टिकल एग्जीक्यूशन को तब तक संभाल सकते हैं जब तक रेवेन्यू स्केल एक डेडिकेटेड सी-सूट प्रोफेशनल को जस्टिफाई न करे। जो कंपनियां अपने शुरुआती ग्रोथ फेज में एक लीन, फंक्शनल टीम बनाने को प्राथमिकता देती हैं, वे आम तौर पर कैपिटल की कमी और सेक्टर-वाइड डिमांड स्लोडाउन के दौर को नेविगेट करने के लिए बेहतर स्थिति में होती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.