IPO छोड़ Secondary Sale को तरजीह दे रहे VCs, भारत AI में ग्लोबल रेस में क्यों पीछे?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IPO छोड़ Secondary Sale को तरजीह दे रहे VCs, भारत AI में ग्लोबल रेस में क्यों पीछे?
Overview

इंडिया में वेंचर कैपिटल (VC) फर्म्स, Lightspeed जैसी, अब पारंपरिक IPO की जगह Secondary Share Sales को ज्यादा अहमियत दे रही हैं। Lightspeed के पार्टनर Bejul Somaia का कहना है कि यह एक बड़ा ट्रेंड है, और उन्होंने भारत में Artificial Intelligence (AI) को अपनाने की रफ़्तार पर चिंता भी जताई है, जो ग्लोबल स्तर से धीमी लग रही है।

VCs को लिक्विडिटी के लिए Secondary Sales ज़्यादा भा रहीं

Bejul Somaia, Lightspeed Venture Partners के एक प्रमुख व्यक्ति, वेंचर कैपिटल फर्मों के निवेश से बाहर निकलने के तरीकों में एक बड़ा बदलाव देख रहे हैं। उनका कहना है कि पारंपरिक IPO की तुलना में Secondary Share Sales को लेकर एक स्पष्ट तरजीह है। यह एक व्यापक ट्रेंड को दर्शाता है, जहाँ VCs और उनके निवेशकों के लिए लिक्विडिटी (Liquidity) प्रदान करने में Secondary Sales, IPOs से आगे निकल रही हैं। डेटा बताता है कि हाल ही में अमेरिका में वेंचर सेकेंडरी सेल्स ने IPO एग्जिट वैल्यूज को पार कर लिया है। यह दिखाता है कि कंपनियां अब प्राइवेट लंबे समय तक रह रही हैं, और निवेश से बाहर निकलने के लिए IPO कम भरोसेमंद हो गए हैं। Lightspeed जैसी फर्मों के लिए, जिन्होंने सेकेंडरी सेल्स और कंटीन्यूएशन फंड्स का इस्तेमाल करके कैपिटल वापस किया है, यह स्ट्रैटेजी अधिक लचीलापन और नियंत्रण देती है, खासकर अनिश्चित आर्थिक माहौल और मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान। अब फोकस पब्लिक मार्केट में डेब्यू करने के बजाय, किसी भी तरीके से निवेशकों को कैपिटल वापस करने की मुख्य आवश्यकता पर शिफ्ट हो गया है।

AI ग्रोथ पर ग्लोबल जोखिमों का साया

Artificial Intelligence (AI) वेंचर कैपिटल का ध्यान लगातार आकर्षित कर रहा है, इसे एक जनरेशन-डिफाइनिंग टेक्नोलॉजी थीम माना जा रहा है जो असाधारण कंपनी परफॉरमेंस को बढ़ावा दे रही है। 2024 में AI कंपनियों के लिए ग्लोबल फंडिंग $100 बिलियन से अधिक हो गई, जिसने वेंचर कैपिटल का एक बड़ा हिस्सा लिया और AI डेवलपर्स और स्टार्टअप्स के लिए हाई वैल्यूएशन (Valuation) को बढ़ाया। हालांकि, AI निवेश में इस उछाल के साथ-साथ भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भी बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, पश्चिम एशिया की घटनाओं के कारण निवेशक अधिक सतर्क हो रहे हैं, रिस्क प्रीमियम बढ़ रहा है और कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) अधिक सेलेक्टिव हो रहा है। वेंचर फर्मों को अपनी अंतर्राष्ट्रीय रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा, संभवतः जोखिम भरे क्षेत्रों से फंड्स को शिफ्ट करना होगा और वैश्विक अस्थिरता से कम प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी होगी। टेक्नोलॉजी के अवसर और भू-राजनीतिक जोखिम के इस मिश्रण के लिए एक अधिक अनुशासित निवेश दृष्टिकोण की आवश्यकता है, क्योंकि कैपिटल अब मार्केट के हाइप (Hype) से कहीं ज्यादा भू-राजनीतिक जरूरतों का पीछा कर रहा है।

भारत की AI रफ़्तार ग्लोबल साथियों से पिछड़ रही

जबकि ग्लोबल AI निवेश आसमान छू रहा है, Somaia ने भारतीय उद्यमियों के बीच AI को अपनाने की तात्कालिकता में एक कथित कमी देखी है। वह AI की तुलना मोबाइल फोन और इंटरनेट के परिवर्तनकारी प्रभाव से करते हैं, इसे एक लोकतांत्रिकताई शक्ति के रूप में देखते हैं। हालांकि, वह भारतीय संस्थापकों (Founders) की वर्तमान एंगेजमेंट की रफ़्तार से चिंतित हैं। भारत का AI इकोसिस्टम बढ़ रहा है, लेकिन इसे वैश्विक फंडिंग का एक छोटा सा हिस्सा मिलता है। अधिकांश कैपिटल शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में जाता है, जो कहीं और देखे जाने वाले बड़े, केंद्रित निवेशों के विपरीत है। यह स्थिति, 'संप्रभु AI' (Sovereign AI) और घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते फोकस के साथ, भारत के AI विकास के लिए एक अलग रास्ता दिखाती है। 2012-2014 के इंटरनेट बूम के उत्साह की तुलना में, भारत में ऊर्जा की कथित कमी एक चुनौती है। यह भारतीय उद्यमियों से नवाचार (Innovation) में तेजी लाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों द्वारा अपूरणीय लीड बनाने से पहले AI की क्षमता का लाभ उठाने का आग्रह करता है।

AI वैल्यूएशन जोखिम और भारत की बाधाएँ

OpenAI और Anthropic जैसे AI लीडर्स के लिए अत्यधिक हाई वैल्यूएशन (High Valuations) मार्केट के उत्साह और संभावित बुलबुले (Bubbles) के बारे में वैध चिंताएं पैदा करते हैं। जबकि AI परिवर्तनकारी है, कुछ कंपनियों में कैपिटल के तेजी से प्रवाह से प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल्स (Price-to-Earnings Multiples) का बढ़ना और अवास्तविक ग्रोथ उम्मीदें बढ़ सकती हैं। भारत के लिए, चुनौतियां कई हैं। धीमी गति से अपनाने के अलावा, अस्पष्ट नीतियां और असंगत प्रशासनिक प्रक्रियाएं जैसी समस्याएं डीप-टेक वेंचर्स के लिए आवश्यक दीर्घकालिक निवेशों में देरी कर सकती हैं। जबकि भारतीय IT सर्विस कंपनियां AI में निवेश कर रही हैं, उनमें अमेरिका में पाए जाने वाले अग्रणी, शुद्ध-प्ले AI नवप्रवर्तक (Innovators) की कमी है। यह उन्हें मुख्य AI तकनीक के निर्माता के बजाय इंटीग्रेटर (Integrators) के रूप में स्थापित करता है। भू-राजनीतिक जलवायु और अधिक जोखिम जोड़ती है, जो क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो को प्रभावित कर सकती है और नए वेंचर्स के लिए कैपिटल की लागत बढ़ा सकती है।

भारत के AI के लिए आगे क्या?

AI के क्षेत्र में Lightspeed की निरंतर प्रतिबद्धता, इसके महत्वपूर्ण फंडरेज़िंग (Fundraising) और पिछले निवेशों से दिखाई देती है, जो सेक्टर की दीर्घकालिक क्षमता में मजबूत विश्वास का संकेत देती है। कैटेगरी पायनियर्स (Category Pioneers) को बैक करने की फर्म की रणनीति उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करती है जिनके पास मजबूत तकनीकी नींव है और जो भविष्य के बाजारों को परिभाषित करने के लिए तैयार हैं। भारत के लिए, आगे का रास्ता इसके बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम में AI इंटीग्रेशन को तेज करने का मतलब है। इसके लिए एक ऐसा वातावरण बनाने की आवश्यकता है जो तेजी से नवाचार (Innovation) को प्रोत्साहित करे और अपने मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करे। भारत के स्टार्टअप सीन में अनुशासित, परफॉरमेंस-लेड ग्रोथ (Performance-led Growth) की ओर एक बदलाव, AI डेवलपमेंट पर फोकस के साथ, भविष्य की सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह उद्यमी ड्राइव (Entrepreneurial Drive) के AI की परिवर्तनकारी क्षमता से मेल खाने पर निर्भर करता है।

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