Unicorn India Ventures: अब US में खुलेगा स्टार्टअप्स की कामयाबी का रास्ता, कंपनी ने बढ़ाई अपनी पहुंच

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Unicorn India Ventures: अब US में खुलेगा स्टार्टअप्स की कामयाबी का रास्ता, कंपनी ने बढ़ाई अपनी पहुंच

वेंचर कैपिटल फर्म Unicorn India Ventures ने अब अमेरिका (US) में अपना दफ्तर खोल दिया है। इसका मकसद भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर तेजी से बड़ा बनाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्जिट (Exit) के बेहतर मौके दिलाना है। कंपनी अभी अपना चौथा फंड निवेश कर रही है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग और एयरोस्पेस जैसे डीप-टेक सेक्टर पर आधारित है।

अमेरिकी बाजार पर नजर

Unicorn India Ventures की इस नई पारी का मुख्य लक्ष्य भारतीय पोर्टफोलियो कंपनियों को अमेरिकी बाजार तक सीधी पहुंच दिलाना है। कंपनी चाहती है कि उसके स्टार्टअप्स सिर्फ भारत तक सीमित न रहें, बल्कि अमेरिका की बड़ी कंपनियों के साथ एक्विजिशन (Acquisition) या बड़े अंतरराष्ट्रीय ग्रोथ के मौके तलाशें। अमेरिकी ऑपरेशंस की कमान किशोर कनाकामेडला (Kishore Kanakamedala) संभालेंगे, जो वहां की मार्केट स्ट्रैटेजी को तैयार करेंगे।

फंड और डीप-टेक पर फोकस

कंपनी फिलहाल अपने चौथे फंड को डिप्लॉय कर रही है, जिसका पहला क्लोज ₹450 करोड़ पर हो चुका है। इस फंड की पार्टनरशिप IIT मद्रास और IIT मद्रास रिसर्च पार्क के साथ है। यह फंड खास तौर पर सेमीकंडक्टर डिजाइन, एयरोस्पेस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। याद दिला दें कि कंपनी के पिछले तीसरे फंड की वैल्यू ₹1,200 करोड़ थी, जिसका बड़ा हिस्सा अमेरिकी निवेशकों से ही जुटाया गया था।

चुनौतियां और उम्मीदें

भारतीय स्टार्टअप्स के लिए यह एक नई चुनौती भी है। जहां भारत में $5 मिलियन का रेवेन्यू एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, वहीं अमेरिकी बाजार में बड़ी वैल्यूएशन के लिए $50 मिलियन का रेवेन्यू का टारगेट रखा जाता है। यह 'मैच्योरिटी गैप' पाटना स्टार्टअप्स के लिए आसान नहीं होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी इन स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना सफल बना पाती है और यह क्रॉस-बॉर्डर स्ट्रैटेजी निवेशकों के लिए कितना रिटर्न जनरेट करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.