अर्ली-स्टेज वेंचर कैपिटल फर्म Unicorn India Ventures ने अब अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है। कंपनी अपने भारतीय डीप-टेक पोर्टफोलियो को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए पूर्व Google एग्जीक्यूटिव किशोर कनाकामडाला (Kishore Kanakamedala) को वेंचर पार्टनर के रूप में नियुक्त किया है। यह कदम हाल ही में क्लोज हुए **₹1,200 करोड़** के तीसरे फंड के बाद उठाया गया है।
ग्लोबल विस्तार की रणनीति
Unicorn India Ventures अब अपनी ऑपरेशंस को अमेरिका तक बढ़ा रही है ताकि उनकी पोर्टफोलियो कंपनियां ग्लोबल लेवल पर स्केल कर सकें। कंपनी का मुख्य लक्ष्य भारतीय डीप-टेक इनोवेशन और अमेरिकी बाजार के बीच एक सीधा सेतु बनाना है। इस विस्तार के साथ ही कंपनी का फोकस अपनी 54 कंपनियों के पोर्टफोलियो को मजबूती देने पर है, जिसे वे करीब $350 मिलियन के फंड से मैनेज कर रहे हैं।
निवेश का तरीका और फोकस
फर्म का निवेश अक्सर अर्ली-स्टेज कंपनियों में होता है, जहां टिकट साइज ₹10 करोड़ से ₹25 करोड़ के बीच रहता है। अमेरिका में ऑफिस खोलने से स्पेस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स में काम कर रही कंपनियों को न केवल विदेशी ग्राहक मिलेंगे, बल्कि उन्हें इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स और बड़े इन्वेस्टर नेटवर्क का भी फायदा होगा। इससे पहले कंपनी IITM Unicorn Frontier Fund के जरिए रिसर्च-बेस्ड कंपनियों को सपोर्ट कर चुकी है।
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि यह विस्तार बड़े अवसरों के द्वार खोलता है, लेकिन इसके साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हैं। अमेरिका के अलग रेगुलेटरी ढांचे को समझना और दो देशों में ऑपरेशंस को कुशलता से मैनेज करना एक बड़ी परीक्षा होगी। क्या भारतीय स्टार्टअप्स अमेरिका जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी जगह बना पाएंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह इंटरनेशनल फुटप्रिंट कितना जल्दी कंपनियों को बेहतर एग्जिट (Exit) या रिवेन्यू ग्रोथ दिलाने में मदद करता है।
