B2B ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Udaan ने **$160 मिलियन** का एक बड़ा फाइनेंसिंग पैकेज हासिल किया है। इसमें इक्विटी, नया कर्ज और कर्ज का इक्विटी में रूपांतरण शामिल है। इस कदम से कंपनी अपने कैपिटल स्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और भारत में डोमिसाइल शिफ्ट करके पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ेगी।
कंपनी का खज़ाना मजबूत, कर्ज हुआ हल्का
भारत के B2B ई-कॉमर्स स्पेस में एक बड़ा नाम, Udaan, ने $160 मिलियन की फाइनेंसिंग डील को अंतिम रूप दे दिया है। इस डील में नई इक्विटी, फ्रेश डेट फैसिलिटीज और मौजूदा डेट इंस्ट्रूमेंट्स को इक्विटी में बदलने का मिश्रण शामिल है। इस पुनर्गठन के ज़रिए, कंपनी अपने बैलेंस शीट को सरल बनाना चाहती है और भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग के अपने लंबे समय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत करना चाहती है।
इक्विटी का इंजेक्शन और कर्ज का पुनर्गठन
इस फाइनेंसिंग पैकेज में मौजूदा निवेशकों के साथ-साथ एक नई ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म से फ्रेश इक्विटी का निवेश शामिल है। कंपनी ने अपने कन्वर्टिबल बॉन्ड होल्डर्स के साथ भी शर्तों पर बातचीत की है। इस समझौते के तहत, इन बॉन्ड्स का एक हिस्सा इक्विटी में बदला जाएगा, जबकि बाकी बचे कर्ज की मैच्योरिटी और शर्तों को आगे बढ़ाया गया है। इस पुनर्गठन का मकसद तत्काल भुगतान के दबाव को कम करना और कंपनी को अपने ऑपरेशनल लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिक गुंजाइश देना है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में BlackRock जैसी फर्मों को इस फाइनेंसिंग के प्राइवेट-क्रेडिट हिस्से से जोड़ा गया है, पर कंपनी ने इन डिटेल्स की पुष्टि नहीं की है।
विदेशी इंसॉल्वेंसी की चुनौतियों का सामना
यह घोषणा कंपनी की ऑफशोर होल्डिंग एंटिटी, Trustroot Internet, से जुड़े कानूनी मामलों के बीच आई है। जून 2026 के अंत में मैच्योर होने वाले $170 मिलियन के कन्वर्टिबल नोट्स पर डिफ़ॉल्ट के बाद लेनदारों ने सिंगापुर हाई कोर्ट में Trustroot के खिलाफ इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू की थी। कंपनी के अनुसार, ये कार्यवाही ऑफशोर हितधारकों तक सीमित हैं और भारत के भीतर की मुख्य व्यावसायिक गतिविधियों से अलग हैं। हालिया फाइनेंसिंग और पुनर्गठन समझौते का उद्देश्य इन दावों को हल करना है, जिनकी कुल राशि ब्याज सहित लगभग $178 मिलियन बताई गई थी।
पब्लिक लिस्टिंग की ओर कदम
यह फंडिंग राउंड जून 2025 में हासिल किए गए $114 मिलियन के सीरीज G राउंड के बाद आया है। कंपनी के को-फाउंडर Vaibhav Gupta ने पहले कंपनी के कॉरपोरेट डोमिसाइल को सिंगापुर से भारत में स्थानांतरित करने की एक रणनीतिक बदलाव की रूपरेखा तैयार की थी। इस प्रक्रिया को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि इस लिस्टिंग का समय अगले 9 से 18 महीनों में हो सकता है, जो डोमिसाइल माइग्रेशन प्रक्रिया और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा। निवेशकों को कंपनी के डोमिसाइल शिफ्ट की प्रगति और आने वाले फाइनेंशियल अपडेट्स में कंपनी के इंटरेस्ट बर्डन और कैश फ्लो पर इस डेट रीस्ट्रक्चरिंग के वास्तविक प्रभाव पर नज़र रखनी चाहिए।
