रिसर्च को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना
University of Chicago का Polsky Centre, India Deep Tech Alliance (IDTA) और IIT बॉम्बे (SINE), IIT दिल्ली (FITT), और IIT मद्रास रिसर्च पार्क जैसे प्रमुख IITs के इनोवेशन नेटवर्क्स के साथ मिलकर इस खास प्रोग्राम को लीड कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय IIT-अफिलिएटेड स्टार्टअप्स को ग्लोबल मार्केट की स्ट्रेटेजी बनाने और इंटरनेशनल फंडिंग हासिल करने में मदद करना है। यह पहल भारत की तकनीकी इनोवेशन को ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी।
क्रॉस-बॉर्डर वेंचर ब्रिज
यह 10 हफ्ते का एक्सेलेरेटर अप्रैल से जून 2026 तक चलेगा और इसमें 15 स्टार्टअप्स को शामिल किया जाएगा। पार्टिसिपेंट्स खास वर्कशॉप्स, एक्सपर्ट कोचिंग और संभावित कस्टमर्स व इन्वेस्टर्स के साथ सीधे जुड़ने का मौका पाएंगे। प्रोग्राम का लक्ष्य फाउंडर्स को उनकी टेक्निकल इनोवेशन को मार्केट के लिए आकर्षक बनाना, ग्लोबल फंडरेज़िंग के लिए भरोसा बढ़ाना और कमर्शियलाइजेशन में तेज़ी लाना है। जून 2026 में इंडिया और 'बे एरिया' (Bay Area) में खास शोकेस इवेंट्स भी ऑर्गनाइज़ किए जाएंगे ताकि टॉप परफॉर्मिंग कंपनियों को दिखाया जा सके।
डीप टेक की ग्लोबल महत्वाकांक्षाएँ और IITs की ताकत
भारत का डीप टेक इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है और ग्लोबल लेवल पर छठे स्थान पर है। अकेले AI फंडिंग में भी भारत ने अच्छी पकड़ बनाई है, जहाँ डीप टेक कुल वेंचर कैपिटल (Venture Capital) एक्टिविटी का लगभग 15% है। IIT मद्रास जैसे संस्थानों ने 500 से ज़्यादा डीप टेक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है, जो IIT नेटवर्क की मजबूत इनोवेशन क्षमता को दर्शाता है। India Deep Tech Alliance (IDTA) ने तो डीप टेक फंडिंग के लिए $1 बिलियन से ज़्यादा का वादा किया है, जो भारत की क्षमता पर इन्वेस्टर के भरोसे को दिखाता है। यह एक्सेलेरेटर इसी मोमेंटम का फायदा उठाएगा।
चुनौतियाँ और बाधाएं
हालांकि, भारतीय डीप टेक स्टार्टअप्स के ग्लोबल लेवल पर आगे बढ़ने में कई मुश्किलें भी हैं। रेगुलेटरी कॉम्प्लेक्सिटीज, अलग-अलग लीगल फ्रेमवर्क और फाउंडर्स के लिए यूएस वीज़ा रिस्ट्रिक्शन्स जैसी चीजें कस्टमर मीटिंग्स और ऑपरेशनल स्पीड को धीमा कर सकती हैं। डीप टेक वेंचर्स में जेस्टेशन पीरियड (gestation period) ज़्यादा होता है, जिसके लिए पेशेंट कैपिटल (patient capital) की ज़रूरत होती है, जो अक्सर ट्रेडिशनल वेंचर टाइमलाइन से मेल नहीं खाती। भले ही भारत डीप टेक इकोसिस्टम में ऊपर है, लेकिन फंडिंग के मामले में वह अभी भी अमेरिका से पीछे है, भले ही IDTA जैसे बड़े वादे हुए हों। अकादमिक रिसर्च को प्रैक्टिकल, कॉमर्शियल प्रोडक्ट्स में बदलना एक चुनौती बनी हुई है।
भविष्य की राह
यह इंडिया डीप टेक एक्सेलेरेटर प्रोग्राम, टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट में बढ़ते US-इंडिया कोलैबोरेशन का हिस्सा है। Polsky Centre की विशेषज्ञता और कस्टमर व इन्वेस्टर कनेक्शन्स पर फोकस, भारतीय डीप टेक के लिए मार्केट एक्सेस की कमी को पूरा करेगा। भारत सरकार ने भी डीप टेक कंपनियों के लिए रिकग्निशन पीरियड को 20 साल तक बढ़ा दिया है, जिससे लॉन्ग-टर्म पॉलिसी एनवायरनमेंट बेहतर हुआ है। इस प्रोग्राम की सफलता इस बात से तय होगी कि भारतीय डीप टेक कंपनियाँ ग्लोबल मार्केट में कितनी अच्छी तरह अपनी जगह बना पाती हैं और कितनी फंडिंग जुटा पाती हैं।