सुप्रीम कोर्ट का टाइगर ग्लोबल पर टैक्स; स्टार्टअप इकोसिस्टम ने स्पष्टता मांगी
15 जनवरी 2026 को दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में, भारत की सुप्रीम कोर्ट ने निवेश फर्म टाइगर ग्लोबल के खिलाफ फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि टाइगर ग्लोबल को 2018 में वॉलमार्ट को फ्लिपकार्ट शेयरों की बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा [3, 4, 6, 7, 10, 11, 19]। शीर्ष अदालत ने निचली अदालतों के फैसलों को पलट दिया, कर अधिकारियों से सहमत होते हुए कि टाइगर ग्लोबल द्वारा उपयोग की जाने वाली मॉरिशस-आधारित संस्थाएं कर से बचाव के लिए बनाई गई 'फ्रंट्स' या 'कंड्यूट्स' थीं और उनमें पर्याप्त वाणिज्यिक पदार्थ (commercial substance) नहीं था [3, 4, 11, 19]। परिणामस्वरूप, कोर्ट ने फर्म को इंडिया-मॉरीशस डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) का लाभ देने से इनकार कर दिया [3, 4, 6, 7, 10, 11, 19]। यह निर्णय कर मामलों में 'substance over form' के सिद्धांत को मजबूत करता है और भारत के जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल्स (GAAR) के अनुप्रयोग को मान्य करता है [3, 4, 19]। टाइगर ग्लोबल ने 2011 और 2015 के बीच मॉरीशस संस्थाओं के माध्यम से फ्लिपकार्ट में निवेश किया था और 2018 में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिससे कथित तौर पर 1.6 बिलियन डॉलर से अधिक का कैपिटल गेन हुआ [3, 5, 9, 25]|
स्टार्टअप इकोसिस्टम कर निर्णय के बीच आश्वासन चाहता है
स्टार्टअप पॉलिसी फोरम (SPF), जिसमें एथर एनर्जी, क्रेड और रेजरपे सहित 60 से अधिक भारतीय स्टार्टअप शामिल हैं, ने वित्त मंत्रालय से संपर्क किया है। उन्होंने इस फैसले के विदेशी निवेशकों को मिश्रित संकेत भेजने की क्षमता पर चिंता व्यक्त की है [1, 11]। SPF की संस्थापक, श्वेता राजपाल कोहली, ने सरकार से कर संधियों की संतुलित व्याख्या करने और निवेशक विश्वास बनाए रखने के लिए आश्वासन प्रदान करने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा, जो विदेशी पूंजी पर बहुत अधिक निर्भर है [1, 11]|
अपनी सिफारिशों में, SPF ने कर विभाग से स्पष्टीकरण संबंधी परिपत्र जारी करने का आग्रह किया है। ये परिपत्र GAAR के गैर-पूर्वव्यापी (non-retroactive) अनुप्रयोग को उन वास्तविक होल्डिंग्स के लिए सुनिश्चित करेंगे जो 1 अप्रैल, 2017 से पहले स्थापित की गई थीं, भले ही बिक्री बाद में हुई हो। उनका तर्क है कि इससे सुलझे हुए मामलों को फिर से खोला नहीं जाएगा और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण निश्चितता प्रदान की जाएगी [1, 11]। ऐतिहासिक रूप से, मॉरीशस भारत में निवेश के लिए एक पसंदीदा क्षेत्राधिकार था, जहां इंडिया-मॉरीशस DTAA के तहत कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती थी। जबकि 2016 में संशोधन और 1 अप्रैल, 2017 से GAAR की शुरुआत ने इस परिदृश्य को बदल दिया, 'ग्रैंडफादरिंग' प्रावधानों ने अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेशों की रक्षा की थी [14, 15, 16, 17, 19]। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तात्पर्य है कि GAAR, 1 अप्रैल, 2017 के बाद के लेनदेन के लिए, भले ही निवेश संरचना की स्थापना की तारीख कुछ भी हो, संधि लाभों पर पूर्वव्यापी हो सकता है [19]|
बाजार और निवेशक भावना पर प्रभाव
इस ऐतिहासिक निर्णय से भारत में ऑफशोर निवेश संरचनाओं और संधि दावों के लिए बढ़ी हुई जांच का दौर शुरू होने की उम्मीद है [5, 8, 10, 25]। कर विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि विदेशी निवेशकों और निजी इक्विटी फर्मों को संधि लाभों का दावा करने के लिए अपने चुने हुए क्षेत्राधिकारों में अधिक ठोस वाणिज्यिक उपस्थिति और नियंत्रण प्रदर्शित करने की आवश्यकता होगी, केवल टैक्स रेजीडेंसी सर्टिफिकेट (TRCs) पर निर्भरता से हटकर [3, 8, 19, 25]। इस फैसले से निवेश संरचनाओं का पुनर्मूल्यांकन, निकास मूल्यांकन पर संभावित प्रभाव और सौदे की बातचीत की समय-सीमा में विस्तार हो सकता है [8]। जबकि सरकार ने, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण जैसे व्यक्तियों के माध्यम से, चिंताओं को 'भटकाव' कहकर खारिज कर दिया है, स्टार्टअप इकोसिस्टम द्वारा स्पष्टता की मांग विदेशी पूंजी के लिए भारत के कर व्यवस्था की पूर्वानुमेयता के बारे में चल रहे डर को उजागर करती है [11]।