Samsung India ने अपने 'सॉल्व फॉर टुमॉरो' (Solve for Tomorrow) प्रोग्राम के लिए 100 टीमों को शॉर्टलिस्ट किया है। इन टीमों में से टॉप 4 विजेताओं को कुल ₹2 करोड़ की इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगी। यह पहल 14-22 साल के युवाओं के बीच सामुदायिक चुनौतियों के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान खोजने को बढ़ावा देती है।
Detailed Coverage
कौन बना 'सॉल्व फॉर टुमॉरो' का हिस्सा?
Samsung India ने अपने 'सॉल्व फॉर टुमॉरो' (Solve for Tomorrow) प्रोग्राम के अगले चरण में 100 टीमों को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। यह एक लंबे समय से चला आ रहा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) प्रयास है, जिसका मकसद देशभर के युवा इनोवेटर्स को पहचानना और उन्हें मेंटरशिप देना है। देश के 135 शहरों में 184 डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स के बाद, कंपनी ने प्रतिभागियों की संख्या घटाकर 100 टीमों तक सीमित कर दी है। इन चुनी हुई टीमों को अब अपने आइडिया को प्रैक्टिकल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन में बदलने के लिए एक्सपर्ट मेंटरशिप मिलेगी।
₹2 करोड़ की ग्रांट और IIT दिल्ली का सपोर्ट
इस प्रोग्राम के तहत चयनित प्रतिभागियों को फाइनेंशियल और टेक्निकल, दोनों तरह की मदद दी जाएगी। इस चरण से निकलने वाली टॉप 4 टीमों को कुल ₹2 करोड़ की इनक्यूबेशन ग्रांट (incubation grant) दी जाएगी। सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि यह प्रोग्राम IIT दिल्ली की Foundation for Innovation and Technology Transfer (FITT) के साथ मिलकर प्रोटोटाइप डेवलपमेंट (prototype development) में भी खास टेक्निकल सपोर्ट मुहैया कराएगा। इसका मकसद युवा उद्यमियों के आइडिया को रिसर्च से मार्केट तक लाने में मदद करना है।
लोकल इनोवेशन पर फोकस
Samsung के लिए, यह पहल भारतीय युवाओं से जुड़ने का एक जरिया है। 14 से 22 साल की उम्र के युवाओं पर ध्यान केंद्रित करके, कंपनी स्थानीय सामुदायिक समस्याओं के समाधान के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रही है। यह भारत में इस प्रोग्राम का पांचवां साल है। हालांकि, इस ग्रांट का सीधा फाइनेंशियल इम्पैक्ट कंपनी के सालाना टर्नओवर के मुकाबले मामूली है, लेकिन यह एक एंगेजमेंट टूल के तौर पर काम करता है, जिससे ब्रांड को भविष्य की प्रतिभाओं और मार्केट ट्रेंड्स को समझने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या?
निवेशक और एक्सपर्ट ऐसी CSR पहलों को किसी भी कंपनी की ब्रांड वैल्यू और कम्युनिटी एंगेजमेंट के प्रति प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखते हैं। प्रतिभागियों के लिए, असली फायदा मिलने वाली मेंटरशिप और उनके प्रोटोटाइप को मिलने वाले संभावित वेंचर कैपिटल (venture capital) या इंस्टीट्यूशनल फंडिंग के अवसरों में है। अब सभी की निगाहें विजेता टीमों की घोषणा और उनके प्रोटोटाइप के आगे के सफर पर टिकी रहेंगी।
