Sakhi Seed: 200 महिला उद्यमियों को मिलेगी ₹5 लाख की आर्थिक मदद और मेंटरशिप

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sakhi Seed: 200 महिला उद्यमियों को मिलेगी ₹5 लाख की आर्थिक मदद और मेंटरशिप
Overview

CNBC TV18 के Future Female Forward ने 'Sakhi Seed' नाम से एक नई पहल शुरू की है। इसका मकसद 200 ग्रामीण महिला माइक्रो-एंटरप्रेन्योर्स को फंडिंग (Funding) और मेंटरशिप (Mentorship) देना है। यह प्रोग्राम खासतौर पर उन महिलाओं को टारगेट कर रहा है जिनमें 'पूंजी से डर' (lack of courage from capital) है, न कि खुद उद्यमी के तौर पर।

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कैपिटल गैप को भरना

'Sakhi Seed' पहल भारत में फाइनेंशियल एक्सक्लूजन (Financial Exclusion) यानी वित्तीय समावेशन की कमी को दूर करने का एक नया तरीका है। इस इनिशिएटिव का मुख्य आइडिया यह है कि महिलाओं के छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी रुकावट उद्यमियों की 'हिम्मत' की कमी नहीं, बल्कि कैपिटल (पूंजी) का इन वेंचर्स को पहचानने और सपोर्ट करने से हिचकिचाना है। ₹5 लाख की किस्तों में मिलने वाली ग्रांट (Grant) और XIM यूनिवर्सिटी से मिलने वाली कॉम्प्रिहेंसिव मेंटरशिप के ज़रिए, 'Sakhi Seed' का लक्ष्य लगभग 200 ग्रामीण महिला उद्यमियों की आर्थिक क्षमता को दिखाना है। ये महिलाएं कम से कम दो साल से स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं, भले ही उनके पास कोई फॉर्मल रजिस्ट्रेशन (Formal Registration) न हो।

मौजूदा सपोर्ट और गैप्स

'Sakhi Seed' सरकारी और प्राइवेट सेक्टर से महिलाओं के बिज़नेस को बढ़ावा देने वाली मौजूदा पहलों के साथ जुड़ता है। स्टैंड-अप इंडिया स्कीम (Stand-Up India Scheme) और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri Mudra Yojana) जैसी स्कीमें बिज़नेस लोन देती हैं, जिसमें MUDRA की 'किशोर' कैटेगरी ₹5 लाख तक का लोन देती है। हालांकि, इनके लिए अक्सर फॉर्मल रजिस्ट्रेशन या क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) की ज़रूरत होती है, जो कई ग्रामीण महिलाओं के पास नहीं होती। दूसरी ओर, Saha Fund और She Capital जैसे प्राइवेट वेंचर कैपिटल फंड (Venture Capital Fund) शुरुआती दौर के, टेक-ड्रिवेन, महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स पर फोकस करते हैं, जो 'Sakhi Seed' के टारगेट माइक्रो-एंटरप्राइजेज से अलग हैं। बंसिधर एंड इला पांडा फाउंडेशन (Bansidhar & Ila Panda Foundation), जो IMFA के ज़रिए एक बड़े सपोर्टर हैं, का भी कम्युनिटी-फोक्स्ड पहलों का इतिहास रहा है। XIM यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी (School of Sustainability) द्वारा दी जाने वाली स्ट्रक्चर्ड मेंटरशिप, जो सिर्फ फाइनेंशियल एड से कहीं ज़्यादा है, एक महत्वपूर्ण गैप को पूरा करती है। यह मेंटरशिप उद्यमियों को फाइनेंस, कंप्लायंस (Compliance) और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन (Technology Adoption) जैसे ज़रूरी बिज़नेस स्किल्स से लैस करने का लक्ष्य रखती है, जो माइक्रो-लेवल से आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ग्रामीण उद्यमियों के लिए चुनौतियाँ

अच्छे इरादों के बावजूद, इन उद्यमियों के लिए कई बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। डेटा के अनुसार, महिलाएं अक्सर क्रेडिट डिसिप्लिन (Credit Discipline) में बेहतर होती हैं, लेकिन बैंकों ने ऐतिहासिक रूप से उन्हें कोलैटरल (Collateral) की कमी और फॉर्मल फाइनेंशियल लिटरेसी (Formal Financial Literacy) जैसे कारणों से ज़्यादा जोखिम वाला माना है। इस धारणा के कारण फाइनेंशियल एक्सक्लूजन जारी है, और लगभग 23% महिलाएं अभी भी फॉर्मल फाइनेंशियल सर्विसेज (Formal Financial Services) से वंचित हैं। 'Sakhi Seed' की सफलता इन गहरी बैठी पूर्वाग्रहों को दूर करने पर निर्भर करती है। 200 बेनिफिशियरीज से आगे प्रोग्राम को स्केल (Scale) करना एक बड़ा सवाल है; 'कैपिटल करेज' की कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास और वित्तीय संस्थानों द्वारा जोखिम का आकलन करने के तरीके में बड़े बदलाव की ज़रूरत होगी। इसके अलावा, 20-50 साल की उम्र की महिलाओं पर फोकस, जो ₹6 लाख सालाना से कम कमाती हैं, उनकी आम तौर पर कम आय के स्तर को उजागर करता है, जो मार्केट की डिमांड और ग्रोथ की संभावना को प्रभावित कर सकता है। भारतीय MSME सेक्टर, जिसका नेतृत्व लगभग 20% मामलों में महिलाओं द्वारा किया जाता है, अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन ग्रामीण MSMEs को अक्सर इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और मार्केट एक्सेस (Market Access) की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा

इस पहल को सिर्फ एक ग्रांट प्रोग्राम के तौर पर नहीं, बल्कि सिस्टमिक चेंज (Systemic Change) के ड्राइवर के तौर पर देखा जा रहा है। ग्रामीण महिला माइक्रो-एंटरप्रेन्योर्स में निवेश की व्यवहार्यता (Viability) को प्रदर्शित करके, 'Sakhi Seed' वित्तीय संस्थानों को उनके रिस्क एपेटाइट (Risk Appetite) पर पुनर्विचार करने और महत्वपूर्ण आर्थिक क्षमता को अनलॉक करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। महिलाओं में निवेश को न केवल सामाजिक रूप से ज़िम्मेदाराना, बल्कि वित्तीय रूप से भी स्मार्ट माना जा रहा है, क्योंकि अध्ययनों से महिलाओं की मज़बूत क्रेडिट रिपेमेंट (Credit Repayment) क्षमताओं का पता चलता है। इस प्रोग्राम की सफलता भारत को उसके आर्थिक लक्ष्यों, जिसमें $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी शामिल है, को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। यह उन समूहों के लिए आत्मनिर्भरता और रोज़गार सृजन को बढ़ावा देगा जिन्हें अक्सर फॉर्मल क्रेडिट से बाहर रखा जाता है। XIM यूनिवर्सिटी द्वारा दो साल की अवधि में प्रोग्राम की यात्रा का दस्तावेज़ीकरण (Documentation) भविष्य में स्केलेबल इंटरवेंशन (Scalable Interventions) के लिए एक ब्लूप्रिंट प्रदान कर सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.