Rentomojo Limited ने अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर दिया है, जिससे पब्लिक मार्केट में लिस्ट होने की उसकी मंशा साफ हो गई है। इस कदम का मकसद भारत की बढ़ती रेंटल इकोनॉमी में अपनी पकड़ मजबूत करना है।
इस IPO में ₹150 करोड़ का फ्रेश इश्यू और लगभग 28.4 मिलियन इक्विटी शेयर्स का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल है। यह स्ट्रैटेजी कंपनी में नया पैसा लाने के साथ-साथ पुराने इन्वेस्टर्स को बाहर निकलने का रास्ता भी देगी। यह फाइलिंग ऐसे समय में आई है जब 2026 की शुरुआत में इंडिया का IPO मार्केट थोड़ा धीमा दिख रहा है। निवेशकों का फोकस अब जल्दी पैसा बनाने के बजाय कंपनी की असल वैल्यू पर ज्यादा है, इसलिए Rentomojo को अपनी ग्रोथ की कहानी दमदार तरीके से पेश करनी होगी।
2014 में Geetansh Bamania द्वारा शुरू की गई Rentomojo, भारत के फर्नीचर और एप्लायंस रेंटल स्पेस में एक जाना-पहचाना नाम है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू के मामले में कंपनी का मार्केट शेयर 42% से 47% के बीच रहा है। ओवरऑल फर्नीचर रेंटल मार्केट 2024 के करीब $360 मिलियन से बढ़कर 2030 तक $780 मिलियन से ज्यादा पहुंचने की उम्मीद है, जिसकी एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 12% से अधिक रहेगी। वहीं, एप्लायंस रेंटल सेक्टर 2030 तक लगभग 16.34% CAGR की दर से बढ़कर $534 मिलियन तक पहुंच सकता है। इस ग्रोथ की वजहें हैं बढ़ती शहरी आबादी, लोगों का एक शहर से दूसरे शहर जाना और खासकर युवा ग्राहकों के बीच सब्सक्रिप्शन मॉडल की बढ़ती लोकप्रियता। Rentomojo फिलहाल 22 शहरों में 2.27 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स को 21 वेयरहाउस के ज़रिए सर्विस दे रहा है। इस सेक्टर में Furlenco, Cityfurnish और Rentickle जैसे कंपटीटर्स भी सक्रिय हैं। कंपनी ने इससे पहले $58.4 मिलियन की फंडिंग जुटाई है, जिसमें फरवरी 2024 का $25 मिलियन का सीरीज डी राउंड भी शामिल है। FY25 में Rentomojo ने ₹266 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹43.11 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया था।
रेंटल बिजनेस मॉडल की अपनी कुछ चुनौतियाँ हैं, जैसे एसेट डेप्रिसिएशन (संपत्ति का मूल्य घटना), इन्वेंटरी को संभालना और ग्राहकों तक डिलीवरी व मेंटेनेंस के लिए लॉजिस्टिक्स का इंतजाम करना। IPO मार्केट का मौजूदा माहौल, जिसमें लिस्टिंग पर बड़े गेन्स की उम्मीद कम है, Rentomojo के वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकता है। हाल के वर्षों में कंपनियों को मिली ऊंची वैल्यूएशन्स के चलते निवेशक अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर भी ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। आर्थिक मंदी या नौकरी के सिलसिले में लोगों का शहरों में आना कम होने जैसी स्थितियाँ सब्सक्राइबर बेस को कम कर सकती हैं, जो Rentomojo के रेगुलर रेवेन्यू के लिए बेहद ज़रूरी हैं। कंपनी को डेट चुकाने और अपने कामकाज के लिए IPO से मिले फंड पर निर्भर रहना होगा, इसलिए लागत पर कंट्रोल बनाए रखना उसकी लगातार प्रॉफिटेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
आने वाले समय में, इस IPO से मिले पैसों का इस्तेमाल कंपनी अपनी मार्केट पहुंच बढ़ाने, टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाने और दूसरी कंपनियों को एक्वायर करने के लिए कर सकती है। अगर Rentomojo मौजूदा IPO माहौल में सफल होता है, तो यह रेंटल सेक्टर की अन्य कंपनियों के लिए एक नजीर बन सकता है। कंपनी की असली कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह मिले हुए कैपिटल को टिकाऊ प्रॉफिटेबिलिटी और मार्केट शेयर ग्रोथ में कैसे बदल पाती है, जबकि कंज्यूमर की डिमांड और कंपटीशन लगातार बदल रहे हैं।