Rapido का बड़ा दांव: अब घर-घर पहुंचेगा खाना!
शहरी मोबिलिटी कंपनी Rapido ने भारतीय फूड डिलीवरी मार्केट में धमाकेदार एंट्री की है। अपने नए प्लेटफॉर्म 'Ownly' के साथ, Rapido ने Prosus, Accel और WestBridge Capital जैसे बड़े निवेशकों से $550 मिलियन से $600 मिलियन (लगभग ₹4,500-₹5,000 करोड़) की फंडिंग हासिल की है। इस कदम का मकसद राइड-हेलिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाओं से आगे बढ़कर कमाई के नए जरिया बनाना है।
कैसे Rapido बदलेगा गेम?
Rapido अपने विशाल राइडर नेटवर्क का इस्तेमाल 'Ownly' के लिए करने की योजना बना रही है। कंपनी का फोकस कम कमीशन दरें रखने और रेस्टोरेंट्स के साथ मजबूत रिश्ते बनाने पर है, जो मौजूदा प्लेयर्स द्वारा अपनाए जाने वाले भारी डिस्काउंट्स से काफी अलग है। यह फंडिंग राउंड, जिसमें Rapido का वैल्यूएशन करीब $3 बिलियन (लगभग ₹25,000 करोड़) आंका गया है, कंपनी को अपनी फूड डिलीवरी सर्विस बेंगलुरु में लॉन्च करने और बाद में विस्तार करने में मदद करेगी।
इंडिया का कॉम्पिटिटिव फूड डिलीवरी मार्केट
भारतीय फूड डिलीवरी मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जिसमें 2026 से 2034 के बीच सालाना 21.62% की ग्रोथ रेट का अनुमान है। इस सेक्टर में Zomato और Swiggy का दबदबा है, जिन्होंने अपने ऑपरेशन्स और प्रॉफिट प्रति ऑर्डर को काफी बेहतर बनाया है। Zomato, जो एक पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी है, ने FY25 में ₹21,320 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू दर्ज किया था और उसका फूड डिलीवरी सेगमेंट 58% मार्केट शेयर रखता है। Zomato अपने फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स (Blinkit) और B2B (Hyperpure) ऑपरेशन्स की बदौलत लगातार प्रॉफिटेबल रही है।
Rapido की स्ट्रेटेजी और चुनौतियां
फूड डिलीवरी को जोड़ना Rapido के अर्बन मोबिलिटी नेटवर्क को बढ़ाने का एक स्मार्ट मूव हो सकता है। हालांकि, Zomato जैसे प्रतिद्वंद्वी कड़ी प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं। Zomato ने सब्सक्रिप्शन प्रोग्राम, ऑपरेशनल सुधारों और फास्टर डिलीवरी जैसी रणनीतियों से प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाया है। Rapido की लो-कमीशन वाली अप्रोच अगर ग्राहकों और रेस्टोरेंट्स को लुभाने में सफल रहती है, तो यह गेम-चेंजर साबित हो सकती है। लेकिन, ऐसे बाजार में जहां वैल्यू सबसे अहम है, नए ग्राहकों और रेस्टोरेंट्स को आकर्षित करना और बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
आगे का रास्ता
Rapido के सामने सबसे बड़ी चुनौती Zomato और Swiggy जैसे स्थापित खिलाड़ियों से निपटना है, जिनके पास पहले से ही बड़े डिलीवरी नेटवर्क, ग्राहक लॉयल्टी और एडवांस प्रेडिक्शन टूल्स हैं। Zomato के Q2 FY26 के नतीजे, जिसमें ₹13,590 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹65 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया गया, इन दबावों को दर्शाते हैं। Rapido को केवल कीमत पर नहीं, बल्कि सर्विस और एफिशिएंसी के दम पर अपनी जगह बनानी होगी, जो कि बाजार के लीडर्स के मुकाबले एक मुश्किल काम है।
