वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक वर्चुअल 'Shark Tank' जैसा प्लेटफॉर्म शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद भारतीय स्टार्टअप्स को सीधे जापानी निवेशकों से जोड़कर 'पेशेंट कैपिटल' (Patient Capital) उपलब्ध कराना है, ताकि अर्ली-स्टेज और डीपटेक वेंचर्स को मजबूती मिल सके।
डीपटेक और अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स पर फोकस
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा 26 अगस्त, 2026 को पेश किए गए इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य केवल बड़ी यूनिकॉर्न कंपनियों तक सीमित न रहकर, उभरते हुए स्टार्टअप्स की मदद करना है। सरकार एक 'Japan-India Deeptech Capital Corridor' बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें जापान की सटीक इंजीनियरिंग (Precision Engineering) और भारत की बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता का मेल कराया जाएगा।
आर्थिक संबंधों को नई रफ्तार
यह पहल दोनों देशों के बीच रिसर्च इकोसिस्टम, यूनिवर्सिटीज और प्राइवेट वेंचर फंड्स को करीब लाएगी। जापानी फर्मों के लिए भारत एक ऐसा बाजार बनेगा जहां वे अपने प्रोडक्ट्स को टेस्ट और स्केल कर सकेंगी। वहीं, भारतीय स्टार्टअप्स को वह 'पेशेंट कैपिटल' मिलेगा जो डीपटेक जैसे जटिल क्षेत्रों में रिसर्च और मुनाफे तक पहुँचने के लिए बेहद जरूरी है।
जोखिम और सतर्कता
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह अभी एक सरकारी पॉलिसी फ्रेमवर्क के स्तर पर है। इसकी सफलता जापानी वेंचर फंड्स की रुचि और प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, विदेशी निवेश में रेगुलेटरी अनुपालन (Compliance), करेंसी में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता जैसे जोखिम भी बने रहते हैं।
निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बातें
फिलहाल यह कोई कॉर्पोरेट घटना नहीं है, इसलिए इसका सीधा असर किसी शेयर पर नहीं पड़ेगा। लेकिन स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े लोगों को यह देखना होगा कि यह 'Shark Tank' सीरीज कितनी तेजी से औपचारिक रूप लेती है और वास्तव में कितना फंड भारत आता है। आने वाले समय में जापान से आने वाले निवेश के आंकड़े ही इस पहल की सफलता का पैमाना होंगे।
