बेंगलुरु की स्पेस स्टार्टअप Pixxel ने अपनी नई अमेरिकी सब्सिडियरी 'Pixxel Federal' को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। कंपनी ने साफ किया है कि भारतीय डिफेंस प्रोजेक्ट्स की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) पूरी तरह से घरेलू कंट्रोल में रहेगी और इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं है।
डेटा सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ
हाल ही में जब Pixxel ने अपनी अमेरिकी शाखा 'Pixxel Federal' की शुरुआत की, तो बाजार में यह चर्चा छिड़ गई कि क्या इस विस्तार से भारतीय डिफेंस और रिसर्च से जुड़े संवेदनशील डेटा को खतरा हो सकता है। अब कंपनी के CEO Awais Ahmed ने खुद सामने आकर सभी चिंताओं को खारिज किया है।
कैसे काम करेगी नई यूनिट?
Awais Ahmed ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी इकाई का मैनेजमेंट और बोर्ड पैरेंट कंपनी से बिल्कुल अलग है। खास तौर पर 'Innovations for Defence Excellence' (iDEX) फ्रेमवर्क के तहत विकसित की गई टेक्नोलॉजी पूरी तरह से भारत में ही सुरक्षित है। कंपनी का कहना है कि यह विभाजन अंतरराष्ट्रीय निर्यात कानूनों और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए जरूरी है।
फंड और ग्रोथ की रफ्तार
सितंबर 2026 में कंपनी ने $10 करोड़ की Series C फंडिंग जुटाई थी, जिसके बाद कुल कैपिटल बढ़कर $19.5 करोड़ हो गई है। यह फंड कंपनी के बेंगलुरु स्थित सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाने में इस्तेमाल हो रहा है।
आगे की चुनौतियां
Pixxel अब दो अलग-अलग देशों के कड़े नियमों के बीच अपना कामकाज संभाल रही है। एक तरफ भारतीय सरकार की जरूरतें हैं, तो दूसरी तरफ NASA और National Reconnaissance Office जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स के साथ काम करने का दबाव। भविष्य में कंपनी के लिए अपनी ग्लोबल ग्रोथ और भारतीय रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
