मैसूर स्थित स्टार्टअप NuSynth Technologies ने सीड राउंड में **₹36.5 करोड़** की फंडिंग जुटाई है। यह कंपनी एआई (AI) का इस्तेमाल कर केमिकल सिंथेसिस प्रोसेस को आसान बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने पर काम कर रही है।
मैसूर के इस स्टार्टअप ने ₹36.5 करोड़ की बड़ी राशि जुटाकर केमिकल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। इस फंडिंग राउंड में प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म Avaana Capital और Shastra VC ने लीड किया है, साथ ही कई एंजेल इन्वेस्टर्स भी शामिल हुए हैं। कंपनी अब इस फंड का इस्तेमाल अपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को एडवांस बनाने के लिए करेगी।
कैसे काम करती है NuSynth की तकनीक?
NuSynth का मुख्य बिजनेस मॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर टिका है। कंपनी पारंपरिक केमिकल सिंथेसिस रास्तों को दोबारा डिजाइन कर रही है। भारत में अभी कई मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस काफी पुराने और खर्चीले हैं, जिससे एनर्जी की खपत ज्यादा होती है। NuSynth अपनी प्रेडिक्टिव मॉडल्स के जरिए रिएक्शन पाथवे को ऑप्टिमाइज कर रही है, ताकि प्रोडक्शन लागत को कम किया जा सके और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को बेहतर बनाया जा सके।
इसका मुख्य लक्ष्य फार्मास्युटिकल और इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर्स पर है, जहां भारत अभी भी आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
टीम और आने वाली चुनौतियां
कंपनी की कमान अनुभवी हाथों में है। CEO पूर्वंक पुरोहित, जो पहले Solara Active Pharma Sciences का नेतृत्व कर चुके हैं, और CTO डॉ. रमेश ए आर (जो नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ का अनुभव रखते हैं) इस स्टार्टअप को लीड कर रहे हैं। इनके साथ Zetwerk और Ola जैसी कंपनियों में काम कर चुके विशेषज्ञ भी जुड़े हैं।
हालांकि, केमिकल सेक्टर में शुरुआती दौर की कंपनियों के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। केमिकल इंडस्ट्री काफी कैपिटल-इंटेंसिव होती है और लैब में सफल प्रयोग को कमर्शियल स्केल पर ले जाना एक बड़ा टास्क है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी का एआई-आधारित मॉडल वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग में कितना किफायती साबित होता है और वे बढ़ते कॉम्पिटिशन का मुकाबला कैसे करते हैं।
