2026 में वेंचर कैपिटल (Venture Capital) की धूम मची है! इस साल रिकॉर्ड **90** स्टार्टअप्स ने **$1 बिलियन** यानी 100 करोड़ डॉलर की वैल्यूएशन का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। AI, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली है, लेकिन इन ऊँची वैल्यूएशन्स का भविष्य इस बात पर टिका है कि ये कंपनियां आगे कितना फंड जुटा पाती हैं और कितना मुनाफा कमाती हैं।
AI सेक्टर में लगा पैसों का अंबार
इस साल यूनिकॉर्न बनने वाली ज्यादातर कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र से हैं। MainFunc, जो AI-इंटीग्रेटेड वर्कस्पेस बनाती है, और EXA, एक AI एजेंट्स के लिए सर्च इंजन प्लेटफॉर्म, जैसी कंपनियों ने बड़ा फंड जुटाया है। Recursive और Positron जैसी रिसर्च-आधारित और हार्डवेयर कंपनियों ने भी अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए मोटी रकम हासिल की है।
AI के सप्लाई चेन से जुड़े टूल्स, जैसे Blitzy के कोडिंग असिस्टेंट और Applied Compute के सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। साफ है, जो कंपनियां AI के 'पिक्स एंड शोवेल्स' यानी AI के विकास के लिए जरूरी टूल्स और हार्डवेयर बना रही हैं, उन पर वेंचर फर्म्स का दांव सबसे ज्यादा लग रहा है।
हेल्थकेयर से मैन्युफैक्चरिंग तक, हर जगह ग्रोथ
AI के अलावा, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में MiRus और Vi Labs जैसी कंपनियों ने AI का इस्तेमाल मेडिकल डिवाइसेज और हेल्थ सर्विसेज में करके $1 बिलियन की वैल्यूएशन पार की है। फिनटेक (FinTech) सेक्टर में भी, खासकर क्रिप्टो से जुड़ी Erebor Bank, और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की SendCutSend जैसी कंपनियों ने भी यूनिकॉर्न क्लब में जगह बनाई है। इससे पता चलता है कि वेंचर कैपिटल सिर्फ सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि फिजिकल मैन्युफैक्चरिंग और खास मेडिकल इक्विपमेंट जैसे कैपिटल-इंटेंसिव एरियाज में भी पैसा लगा रहा है।
वैल्यूएशन के पीछे की हकीकत
कई नई यूनिकॉर्न कंपनियों ने भारी-भरकम फंड जुटाया है। उपभोक्ता हार्डवेयर कंपनी Hark $6 बिलियन की वैल्यूएशन पर पहुंची, वहीं Promethus ने $12 बिलियन की सीरीज B राउंडिंग में $18.2 बिलियन का कुल फंड जुटाया। Humans& की वैल्यूएशन $4.5 बिलियन और Recursive Intelligence की $4 बिलियन रही।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये वैल्यूएशन प्राइवेट फंडिंग राउंड पर आधारित हैं और जरूरी नहीं कि पब्लिक मार्केट में भी इनकी यही परफॉर्मेंस रहे। इन अरबों डॉलर की वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए कंपनियों को अपनी तेज ग्रोथ को लगातार कैश फ्लो और प्रॉफिट में बदलना होगा। आगे चलकर, इन कंपनियों के लिए सबसे अहम होगा उनका 'बर्न रेट' (कितनी तेजी से वे पैसा खर्च कर रही हैं) और बदलती ब्याज दरों के माहौल में भविष्य में भी इसी ऊँची वैल्यूएशन पर फंड जुटाने की उनकी क्षमता।
