NapTapGo को मिले ₹8 करोड़, पॉड होटल नेटवर्क के विस्तार की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NapTapGo को मिले ₹8 करोड़, पॉड होटल नेटवर्क के विस्तार की तैयारी

बजट हॉस्पिटैलिटी स्टार्टअप NapTapGo ने इंफ्लेक्शन पॉइंट वेंचर्स के नेतृत्व में **₹8 करोड़** की सीड फंडिंग हासिल की है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल को-इन्वेस्टमेंट मॉडल के ज़रिए अपने पॉड होटलों के नेटवर्क को बढ़ाने में करेगी, साथ ही ऑपरेशनल कंट्रोल भी अपने पास रखेगी। NapTapGo के प्रॉपर्टीज़ इस समय नोएडा, अमृतसर और कटरा में हैं।

पॉड होटलों का विस्तार

NapTapGo ने ₹8 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है, जिसमें इंफ्लेक्शन पॉइंट वेंचर्स (Inflection Point Ventures) प्रमुख निवेशक रहे। यह वही कंपनी है जिसने 'शार्क टैंक इंडिया' (Shark Tank India) में अपनी पहचान बनाई थी।

को-इन्वेस्टमेंट से बढ़ाएंगे नेटवर्क

कंपनी का प्लान इस नई पूंजी का इस्तेमाल अपने पॉड होटलों के नेटवर्क को तेज़ी से फैलाने का है। NapTapGo अब खुद के पैसों के बजाय, लोकल इन्वेस्टर्स के साथ मिलकर नए यूनिट्स में निवेश करेगी। इस को-इन्वेस्टमेंट मॉडल में, कंपनी डेवलपमेंट का फंड तो साझेदारों से लेगी, लेकिन रोज़मर्रा के ऑपरेशनल कंट्रोल पूरी तरह से अपने हाथ में रखेगी। यह रणनीति तेज़ी से विस्तार करने और साथ ही सभी प्रॉपर्टीज़ में क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को बनाए रखने में मदद करेगी।

बाज़ार में मौजूदगी और भविष्य की रणनीति

फिलहाल NapTapGo के तीन लोकेशन - नोएडा, अमृतसर और कटरा - में 130 से ज़्यादा पॉड्स की क्षमता वाले होटल हैं। कंपनी का दावा है कि अब तक 10,000 से ज़्यादा गेस्ट्स को सर्व कर चुकी है। फाउंडर्स नितिन मल्होत्रा और हिमांशु शुक्ला अब शहरों से बाहर भी विस्तार करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ एक समझौता (MoU) भी किया है। इस पार्टनरशिप का मकसद हाईवे ट्रांजिट लोकेशन पर पॉड होटल डेवलप करना है, खासकर उन यात्रियों के लिए जिन्हें कम समय के लिए सस्ते और साफ ठिकाने की ज़रूरत होती है।

बिज़नेस मॉडल और जोखिम

भारत में पॉड होटल का सेगमेंट अभी छोटा है, लेकिन तेजी से बढ़ रहा है। यह खास तौर पर बजट को ध्यान में रखने वाले यात्रियों और ट्रांजिट यात्रियों को टारगेट करता है। कंपनी का लक्ष्य इन-हाउस ऑपरेशन कंट्रोल करके हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में अक्सर दिखने वाली सर्विस की अनियमितताओं से बचना है। हालांकि, कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह को-इन्वेस्टमेंट मॉडल को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाती है। साथ ही, नए लोकेशन पर उम्मीद से कम डिमांड या हाईवे जैसी दूर-दराज की जगहों पर स्टैंडर्ड ऑपरेशन को स्केल करने में आने वाली चुनौतियों को भी संभालना होगा। बड़े होटल चेन्स के विपरीत, जिनकी आय के कई स्रोत होते हैं, NapTapGo का रेवेन्यू पूरी तरह से बजट पॉड सेगमेंट पर निर्भर करता है, जो डोमेस्टिक ट्रैवल ट्रेंड्स में बदलाव के प्रति संवेदनशील है। इन्वेस्टर्स और स्टेकहोल्डर्स इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी नए यूनिट्स को कैसे इंटीग्रेट करती है और क्या HPCL के साथ साझेदारी से आने वाले समय में हाईवे साइट्स पर होटल खुल पाते हैं।

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