पुणे स्थित डीपटेक फर्म Minimac Systems ने Zerodha के निवेश वेंचर Rainmatter से **₹30 करोड़** की फंडिंग जुटाई है। यह राशि कंपनी के लुब्रिकेंट रीसाइक्लिंग बिजनेस को विस्तार देने और फ्लूइड एनालिटिक्स में रिसर्च के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
रीसाइक्लिंग का अनोखा मॉडल
अंशुमान अग्रवाल और हर्षित अग्रवाल द्वारा साल 2012 में स्थापित यह कंपनी लुब्रिकेंट्स के लाइफसाइकिल को मैनेज करने का काम करती है। इनका सबसे चर्चित मॉडल 'Recycling on Wheels' है, जो इंडस्ट्रियल क्लाइंट्स को उनके अपने प्लांट में ही पुरानी ऑयल्स को प्यूरीफाई करने की सुविधा देता है।
फंड का इस्तेमाल और लक्ष्य
इस ₹30 करोड़ की प्री-सीरीज ए फंडिंग का उपयोग कंपनी अपने रीजनल हब्स को बढ़ाने और सप्लाई चेन को और अधिक मजबूत करने में करेगी। साथ ही, कंपनी अपनी फ्लूइड एनालिटिक्स और फ्लीट ऑटोमेशन तकनीक पर भी काफी खर्च करने वाली है।
भारत के लिए क्यों है जरूरी?
भारत हर साल 50 लाख टन से ज्यादा लुब्रिकेंट की खपत करता है, लेकिन हम अपनी जरूरतों के लिए 60% से ज्यादा बेस ऑयल आयात करते हैं। इससे देश का सालाना इम्पोर्ट बिल $2.7 अरब (लगभग ₹22,000 करोड़) के पार चला जाता है। ऐसे में Minimac जैसे स्टार्टअप का सर्कुलर मॉडल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए लागत कम करने में बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
आगे की चुनौतियां
चूंकि यह एक अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए निवेशकों को पब्लिक मार्केट डेटा की सुविधा नहीं मिलेगी। भविष्य में कंपनी की कामयाबी इस पर निर्भर करेगी कि वह अपने लॉजिस्टिक्स और मोबाइल रीसाइक्लिंग यूनिट्स को मुनाफे के साथ कैसे स्केल कर पाती है। इसके अलावा, भारत की EPR (Extended Producer Responsibility) पॉलिसी में बदलाव भी इस सेक्टर के लिए अहम साबित होंगे।
