Meesho ने वित्त वर्ष 2026 के नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **₹12,626 करोड़** तक पहुंच गया है, लेकिन फ्री कैश फ्लो **₹633 करोड़** के घाटे में चला गया है। मजबूत यूजर ग्रोथ के बावजूद बढ़ते टैक्स विवाद और तगड़ी प्रतिस्पर्धा कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
कैश फ्लो पर खर्च का दबाव
कंपनी ने बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक विस्तार की रणनीति अपनाई है। इसी के चलते ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू 34.5% बढ़कर ₹12,626 करोड़ हो गया है। हालांकि, कस्टमर एक्विजिशन और लॉजिस्टिक्स पर किए गए भारी खर्च के कारण फ्री कैश फ्लो ₹633 करोड़ नेगेटिव हो गया है, जबकि पिछले साल यह ₹591 करोड़ पॉजिटिव था।
कंपनी के एनुअल ट्रांजैक्टिंग यूजर्स 33% बढ़कर 264 मिलियन हो गए हैं और कुल ऑर्डर्स 2.67 बिलियन के पार पहुंच गए हैं। इन सबके बावजूद, मार्केटप्लेस एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 2.8% के नुकसान पर है, जो FY25 में 0.4% था। वहीं, कंट्रीब्यूशन मार्जिन भी गिरकर 3.5% पर आ गया है, जो पिछले साल 4.9% था।
टैक्स विवाद और प्रतिस्पर्धा
निवेशक अब कंपनी के सामने खड़े रिस्क पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। Flipkart और Amazon जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर के बीच, Meesho पर टैक्स विवादों का बोझ भी बढ़ा है। कंपनी के टैक्स विवाद FY26 में बढ़कर ₹2,071.8 करोड़ हो गए हैं। हालांकि कंपनी के पास ₹6,750 करोड़ का कैश रिजर्व मौजूद है, जिसमें दिसंबर 2025 के IPO से जुटाया गया फंड भी शामिल है, लेकिन ये बड़े लायबिलिटीज भविष्य के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।
AI के भरोसे भविष्य की उम्मीदें
बढ़ते खर्चों को कम करने के लिए Meesho अब टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है। कंपनी ने अपना AI-पावर्ड वॉइस-शॉपिंग एजेंट 'Vaani' पेश किया है, जिसे पहले महीने में ही 1.5 मिलियन यूजर्स ने इस्तेमाल किया है और इससे कन्वर्जन रेट में 22% की बढ़ोतरी देखी गई है। अगर कंपनी इन तकनीकी निवेशों के जरिए अपनी कस्टमर सर्विस कॉस्ट कम करने में सफल रहती है, तो लॉन्ग-टर्म मार्जिन्स में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, निवेशकों के लिए टैक्स विवादों की स्थिति और मार्जिन में स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर रहेंगे।
