Livspace ने अपने लीडरशिप और वर्कफोर्स में बड़ा बदलाव किया है। इस फेरबदल के तहत, कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) ललित मित्तल ने पद छोड़ दिया है। साथ ही, लगभग 1,000 कर्मचारियों को भी कंपनी से अलग कर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि यह निर्णय AI-नेटिव (AI-native) ऑपरेशनल मॉडल तैयार करने और रिसोर्सेज को बेहतर ढंग से इस्तेमाल करने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले, कंपनी के इंडिया CEO सौरव जैन ने भी इस्तीफा दिया था।
CBO ललित मित्तल, जिन्होंने छह साल में कंपनी के बिजनेस को चार गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी, अब कंपनी का हिस्सा नहीं होंगे। कंपनी ने इसे 'प्राकृतिक विकास' और 'रणनीतिक पुन: आवंटन' बताया है। इसका मकसद AI एजेंट्स और ऑटोमेशन के ज़रिए मैन्युअल कामों को खत्म करना और टीम की प्रोडक्टिविटी बढ़ाना है। कंपनी की लगभग 12% वर्कफोर्स को इस कदम से प्रभावित हुई है, जो 2020 और 2023 में हुई छंटनी से कहीं ज़्यादा है। यह बताता है कि कंपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) और कॉस्ट मैनेजमेंट (cost management) पर कितनी तेज़ी से ज़ोर दे रही है।
इन आंतरिक उथल-पुथल के बावजूद, Livspace के लेटेस्ट फाइनेंशियल आंकड़े कंपनी की ग्रोथ और मजबूती को दर्शाते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) के लिए, कंपनी ने पिछले साल के ₹1,185 करोड़ की तुलना में 23% की ईयर-ऑन-ईयर (year-on-year) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो अब ₹1,460 करोड़ हो गया है। साथ ही, एडजस्टेड EBITDA लॉस में भी बड़ी कमी आई है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹416 करोड़ से घटकर ₹131 करोड़ रह गया है। ग्रॉस प्रॉफिट में 26% की बढ़त के साथ यह ₹752 करोड़ तक पहुंच गया है। कंपनी के पास लगभग ₹708 करोड़ की कैश रिजर्व भी है।
$1 बिलियन से अधिक की वैल्यूएशन वाली Livspace, भारतीय इंटीरियर डिजाइन मार्केट में HomeLane, Design Cafe और Flipspaces जैसे खिलाड़ियों से मुकाबला कर रही है। वर्तमान स्टार्टअप इकोसिस्टम में फंड जुटाना मुश्किल हो रहा है, और निवेशक स्पष्ट मॉनेटाइजेशन (monetization), ऑपरेशनल कंट्रोल और डीप-टेक (deep-tech), खासकर AI में निवेश पर ध्यान दे रहे हैं। Livspace का AI पर ज़ोर और कॉस्ट-कटिंग के कदम इन इन्वेस्टर प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य संभावित IPO से पहले अपनी स्थिति को मज़बूत करना है, जिसके लिए 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत का लक्ष्य रखा गया था।
हालांकि Livspace AI इंटीग्रेशन को रणनीतिक बता रहा है, बड़े पैमाने पर हुई छंटनी से कर्मचारियों के मनोबल और ऑपरेशनल निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं। 'रणनीतिक पुन: आवंटन' के दावे की भी जांच की जा रही है, क्योंकि बड़े पैमाने पर छंटनी अक्सर फाइनेंशियल दबावों का संकेत देती है, खासकर ऐसे समय में जब फंड जुटाना कठिन हो गया है। रेवेन्यू ग्रोथ और कम हुए घाटे के बावजूद, लगातार प्रॉफिट पर कंपनी का फोकस कुछ चुनौतियों को छिपा सकता है। Livspace ने अब तक $450 मिलियन से अधिक की पूंजी जुटाई है, लेकिन हाल के वर्षों में कोई बड़ा नया निवेश हासिल नहीं किया है, जिससे एफिशिएंसी हासिल करने की ज़रूरत बढ़ गई है। AI पर निर्भरता से टेक्नोलॉजी की वास्तविक प्रभावशीलता और स्केलेबिलिटी (scalability) जैसे जोखिम भी जुड़े हैं।
AI और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की ओर Livspace का रणनीतिक कदम, टियर-II और टियर-III शहरों में विस्तार और किचन एप्लायंसेज जैसे नए प्रोडक्ट लाइन के साथ, मार्केट में अपनी स्थिति को मज़बूत करने का इरादा दिखाता है। कंपनी दिसंबर तक भारत में डोमिसाइल फ्लिप (domicile flip) पूरा करने की दिशा में भी काम कर रही है, जो भविष्य में पब्लिक मार्केट में जाने का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Livspace तकनीकी प्रगति और लागत अनुशासन को लगातार प्रॉफिटेबिलिटी और मार्केट लीडरशिप में कैसे बदल पाती है।