मुंबई स्थित वेंचर कैपिटल फर्म Lightbox अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी अब रिस्की अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स के बजाय ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देगी जो पहले से मुनाफा कमा रही हैं।
मुंबई स्थित वेंचर कैपिटल फर्म Lightbox ने अपनी निवेश रणनीति को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया है। संदीप मूर्ति (Sandeep Murthy) के नेतृत्व में, यह फर्म अब अर्ली-स्टेज (Early-stage) स्टार्टअप्स से हटकर लेट-सीरीज A और अर्ली-सीरीज B कंपनियों की ओर बढ़ रही है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ऐसी कंपनियों के साथ पोर्टफोलियो बनाना है जो पहले से ही पर्याप्त रेवेन्यू (Revenue) जुटा रही हैं और जिनमें मुनाफे का रास्ता साफ है।
क्यों लिया यह बड़ा फैसला?
यह कदम मौजूदा बाजार की स्थितियों को देखते हुए उठाया गया है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम अब 'ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट' (Growth at all costs) के दौर से बाहर निकल रहा है। फंड मैनेजरों और निवेशकों की मांग है कि कंपनियां केवल बाहरी फंड पर निर्भर रहने के बजाय खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएं। Lightbox इसी दिशा में काम कर रही है ताकि अपने चौथे फंड को जुटाते समय संभावित निवेशकों का भरोसा जीत सके।
पिछले अनुभव और चुनौतियां
फर्म का यह निर्णय पोर्टफोलियो में आई चुनौतियों के बाद लिया गया है। पहले भी कंपनी को अपनी पोर्टफोलियो फर्म PayMate के रीस्ट्रक्चरिंग और सैलरी संबंधी मुद्दों का सामना करना पड़ा था। वहीं, ज्वेलरी ब्रांड Melorra का Senco Gold को किया गया सेल भी एक डिस्ट्रेस-रिलेटेड ट्रांजैक्शन था। इन अनुभवों ने लाइटबॉक्स को यह सिखाया है कि जोखिम कम करने के लिए स्थापित कंपनियों के साथ जुड़ना ज्यादा सुरक्षित है।
क्या है सकारात्मक संकेत?
पोर्टफोलियो में दबाव के बावजूद, लाइटबॉक्स को हाल ही में Nua से 6.7 गुना रिटर्न मिला है, जो इसकी निवेश क्षमता को साबित करता है। अब बाजार की नजर इस पर है कि क्या लाइटबॉक्स इस नई रणनीति के साथ अपने चौथे फंड को सफलतापूर्वक जुटा पाएगी और निवेशकों को स्थिर रिटर्न देने में कामयाब होगी या नहीं।
