Larsen & Toubro (L&T) का वेंचर कैपिटल आर्म, L&T Innovation Fund (LTIF), अब अपना निवेश भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स पर केंद्रित कर रहा है। फंड **$1 मिलियन से $10 मिलियन (लगभग ₹8 करोड़ से ₹80 करोड़)** तक का निवेश करेगा।
L&T के बिजनेस में नई जान फूंकने की तैयारी
पहले विदेशी स्टार्टअप्स पर दांव लगाने वाला LTIF अब भारत की उभरती टेक्नोलॉजी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहा है। कंपनी की योजना है कि इन स्टार्टअप्स में 20% से कम की हिस्सेदारी रखी जाए। यह कदम सिर्फ पैसा लगाने के लिए नहीं, बल्कि L&T के विशाल इंडस्ट्रियल बेस को आधुनिक बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। LTIF, एक पारंपरिक वेंचर कैपिटलिस्ट की तरह नहीं, बल्कि एक स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टर के तौर पर काम करेगा। इसका मतलब है कि यह स्टार्टअप्स को L&T के इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन और डिफेंस जैसे बड़े बिजनेस यूनिट्स से सीधे जोड़ेगा।
'L&T मंथन' से तकनीक का इंटीग्रेशन
इस स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा 'L&T मंथन' प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म स्टार्टअप फाउंडर्स को L&T के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स और बिजनेस हेड्स से मिलाने का काम करता है। इससे स्टार्टअप्स को कंपनी के अंदरूनी ढांचे को समझने, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट टेस्ट करने, पायलट प्रोजेक्ट्स चलाने और अंततः कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने में मदद मिलती है। इस तरह, L&T शुरुआती दौर से ही टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में अपना प्रभाव डाल पाएगा, ताकि यह कंपनी की भविष्य की जरूरतों, जैसे इंडस्ट्री 4.0, ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स के अनुरूप हो सके।
ड्रोन डेमो डे और भविष्य की टेक्नोलॉजी
डीपटेक पर फोकस का एक उदाहरण 7 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में हुआ L&T का ड्रोन डेमो डे था। इस इवेंट में 21 स्टार्टअप्स ने अपने सॉल्यूशंस पेश किए, जिनमें लॉन्ग-एंड्योरेंस सर्विलांस यूएवी, एआई-ड्रिवेन नेविगेशन और अंडरवॉटर ड्रोन जैसे नवाचार शामिल थे। इन कंपनियों के साथ जुड़कर, L&T उन स्पेशलाइज्ड टेक्नोलॉजीज को अपनाने की स्थिति में आ रहा है जो इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस प्रोजेक्ट्स में उसकी एफिशिएंसी बढ़ा सकती हैं।
निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बातें
यह डेवलपमेंट निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि L&T एक पारंपरिक, कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में टेक्नोलॉजिकल बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। 31 मार्च 2026 तक, L&T के पास ₹7,40,327 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जो कंपनी के विशाल ऑपरेशन्स का पैमाना दिखाता है। जब L&T इन डीपटेक स्टार्टअप्स के लिए क्लाइंट या पार्टनर के रूप में काम करता है, तो उन्हें स्केल करने के लिए जरूरी कमर्शियल वैलिडेशन मिलता है।
हालांकि, इस अप्रोच में कुछ जोखिम भी हैं। डीपटेक सॉल्यूशंस को लैब या पायलट स्टेज से बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल डिप्लॉयमेंट तक ले जाना मुश्किल होता है और इसमें देरी या लागत बढ़ने का खतरा रहता है। सॉफ्टवेयर-आधारित स्टार्टअप्स के विपरीत, डीपटेक कंपनियों को मैच्योर होने में काफी फिजिकल कैपिटल और समय लगता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि प्रबंधन की कमेंट्री के अनुसार, कितने स्टार्टअप्स पायलट स्टेज से आगे बढ़कर पूरी तरह से कमर्शियल अडॉप्शन तक पहुँच पाते हैं, क्योंकि यही इन वेंचर्स के असल ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) को तय करेगा।
