कर्नाटक के टेक स्टार्टअप्स ने साल 2026 के शुरुआती 9 महीनों में **$4.6 बिलियन** की फंडिंग हासिल की है, जो पिछले साल की तुलना में **26%** ज्यादा है। हालांकि, फंडिंग डील्स की संख्या में **35%** की बड़ी गिरावट आई है।
कर्नाटक के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पूंजी का प्रवाह तो बढ़ा है, लेकिन इसका गणित पूरी तरह बदल गया है। साल 2026 के पहले 9 महीनों में कुल फंडिंग $4.6 बिलियन तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 26% की ग्रोथ है। हालांकि, इस आंकड़े के पीछे एक बड़ी चुनौती छिपी है—कुल फंडिंग डील्स की संख्या 610 से घटकर 397 रह गई है, जो 35% की गिरावट को दर्शाता है।
बड़े दांव, कम खिलाड़ी
इन्वेस्टर्स अब अपना पैसा बिखेरने के बजाय चुनिंदा बड़ी कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं। प्रति राउंड फंडिंग का औसत आकार लगभग दोगुना होकर $11.6 मिलियन हो गया है, जो पिछले साल $6.1 मिलियन था। इसका सबसे ज्यादा असर अर्ली-स्टेज और सीड-स्टेज स्टार्टअप्स पर पड़ा है, जहां सीड फंडिंग में 32% की कमी देखी गई है। कुल फंडिंग का 57% हिस्सा यानी $2.7 बिलियन केवल लेट-स्टेज कंपनियों के पास गया है।
कौन से सेक्टर रहे आगे?
मार्केट में ऑटो टेक और फिनटेक का दबदबा बरकरार है। CRED, Sarvam और Rapido जैसी कंपनियों ने बड़ी पूंजी जुटाने में कामयाबी हासिल की है। भौगोलिक रूप से देखें तो बेंगलुरु अभी भी स्टार्टअप्स का केंद्र बना हुआ है, जबकि मैसूरु और शिवमोग्गा जैसे शहर अभी भी निवेश आकर्षित करने के लिए जूझ रहे हैं।
आगे की राह और चुनौतियां
स्टार्टअप्स के लिए एग्जिट मार्केट (Exit Market) ठंडा पड़ा है। अधिग्रहण (Acquisitions) में 49% की गिरावट आई है, जिससे अर्ली इन्वेस्टर्स के लिए अपने पैसे वापस निकालने के विकल्प सीमित हो गए हैं। अब पब्लिक लिस्टिंग ही एकमात्र प्रमुख रास्ता दिख रहा है। इसके अलावा, बेंगलुरु का इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रैफिक जैसी समस्याएं कंपनियों के विस्तार में बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
