कर्नाटक का मास्टरस्ट्रोक! ₹600 करोड़ से बनाएंगे 25 हजार स्टार्टअप, डीप टेक पर है खास फोकस

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
कर्नाटक का मास्टरस्ट्रोक! ₹600 करोड़ से बनाएंगे 25 हजार स्टार्टअप, डीप टेक पर है खास फोकस
Overview

कर्नाटक सरकार ने प्रदेश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए अपनी नई Startup Policy 2025-2030 का ऐलान किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, राज्य 2030 तक **25,000** नए स्टार्टअप्स को खड़ा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए **₹600 करोड़** का एक विशेष फंड भी तैयार किया जाएगा, जिसमें डीप टेक (Deep Tech) वाली कंपनियों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

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कर्नाटक का 'स्टार्टअप विजन 2030'

राज्य सरकार की यह नई पॉलिसी सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं रहेगी। इसका एक बड़ा हिस्सा यानी 10,000 स्टार्टअप्स को बेंगलुरु के बाहर स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि राज्य के बाकी हिस्सों में भी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके। इतना ही नहीं, सरकार खुद भी इन नई कंपनियों के शुरुआती ग्राहक (Early Customer) बनकर उनके प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को अपनाने में मदद करेगी।

डीप टेक पर बड़ा दांव

यह पॉलिसी नेशनल डीप टेक एंबीशन्स के साथ भी मेल खाती है, जिसे केंद्र सरकार के ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड का भी सपोर्ट मिल रहा है। कर्नाटक का 'डीप टेक डेकेड' (Deep Tech Decade) AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को बूस्ट करने की तैयारी है। इसके लिए डीप टेक फंड्स और रीजनल इनक्यूबेटर्स में खास एलोकेशन किया गया है। ELEVATE NxT के जरिए डीप टेक स्टार्टअप्स को प्रति स्टार्टअप ₹1 करोड़ तक की ग्रांट देने का भी प्लान है।

'इंडियाज सिलिकॉन वैली' की ताकत

यह सब बेंगलुरु की 'इंडियाज सिलिकॉन वैली' वाली पहचान पर आधारित है। कर्नाटक लगातार वेंचर कैपिटल (Venture Capital) को आकर्षित करता रहा है और यहां 10,000 से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं, जिन्हें इनक्यूबेटर्स का मजबूत नेटवर्क सपोर्ट करता है। महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों की तुलना में, कर्नाटक की पॉलिसी में ₹518.27 करोड़ का आउटले और डीप टेक फंड की घोषणाएं काफी दमदार हैं। इसके अलावा, राज्य ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की मेजबानी में भी आगे है, जो एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करते हैं।

राह में बड़े रोड़े

हालांकि, इन बड़े लक्ष्यों को हासिल करने की राह आसान नहीं है। पिछले अनुभवों से पता चलता है कि सरकारी पॉलिसियां ​​अक्सर पहुंच और प्रभावशीलता में संघर्ष करती हैं, जिससे स्टार्टअप कम्युनिटी में असंतोष पैदा हो सकता है। बेंगलुरु के बाहर विकास को फैलाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि ऐतिहासिक डेटा दिखाता है कि संसाधन और सफलताएं अक्सर राजधानी में ही सिमटी रही हैं। इसके अलावा, युवाओं के सोशल मीडिया एक्सेस जैसे रेगुलेटरी मुद्दे भी जटिल हैं, क्योंकि डिजिटल साक्षरता और इसे लागू करने में मुश्किलें आती हैं।

भरोसेमंद फंडिंग और एग्जीक्यूशन

डीप टेक फंड के लिए प्राइवेट सेक्टर के को-इन्वेस्टमेंट (Co-investment) पर निर्भरता, लॉन्ग-टर्म फंडिंग के लिए बाजार-आधारित जोखिम लाती है। यदि कर्नाटक इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटता है, तो यह महत्वाकांक्षी पॉलिसी देश के टेक और इनोवेशन सेक्टर में इसकी लीडरशिप को मजबूत कर सकती है। लेकिन, निरंतर सफलता मजबूत एग्जीक्यूशन (Execution), बाजार के बदलावों के अनुकूल ढलने और नवाचार (Innovation) के साथ सामाजिक चिंताओं को संतुलित करने पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.