कर्नाटक सरकार ने सरकारी सेवाओं में स्टार्टअप समाधानों को शामिल करने के लिए **₹25 करोड़** की एक नई पहल शुरू की है। इस प्रोग्राम के तहत स्टार्टअप्स को हर पायलट प्रोजेक्ट के लिए **₹25 लाख** तक की मदद दी जाएगी ताकि वे सरकारी टेंडर की मुश्किलों को पार कर सकें।
कर्नाटक सरकार ने अपनी 'गवर्नमेंट फर्स्ट' (Government First) पहल के जरिए स्टार्टअप्स के लिए सरकारी ठेके हासिल करने के पुराने और जटिल रास्तों को आसान बना दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभागों को इनोवेटिव टेक्नोलॉजी के लिए 'अर्ली कस्टमर' (Early Customer) के रूप में तैयार करना है।
कैसे काम करेगा यह प्रोग्राम?
इस योजना का प्रबंधन Karnataka Innovation and Technology Society (KITS) द्वारा किया जाएगा। स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत, वे कंपनियां पात्र होंगी जिनका टर्नओवर ₹200 करोड़ से कम है और जिन्हें बने हुए 10 साल से कम समय हुआ है।
खास बात यह है कि इस प्रोग्राम में 95% बजट केवल स्टार्टअप्स की मदद के लिए ही रखा गया है। 'टेस्ट-वैलिडेट-प्रोक्योर' (Test-Validate-Procure) ढांचे के तहत, स्टार्टअप्स को अब लंबी टेंडर प्रक्रियाओं से जूझना नहीं पड़ेगा। साथ ही, वर्क ऑर्डर मिलते ही कंपनी को प्रोजेक्ट लागत का 25% एडवांस पेमेंट भी दिया जाएगा, जिससे उनके लिए काम करना आसान होगा।
स्टार्टअप्स के लिए बड़े फायदे:
- IP राइट्स: इस पॉलिसी में स्टार्टअप्स अपने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IP Rights) खुद ही रखेंगे, जिससे वे बाद में अपने समाधान दूसरे ग्राहकों को भी बेच सकेंगे।
- लक्ष्य: सरकार ने अगले तीन सालों में 100 स्टार्टअप्स को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। साल 2026-27 में 16 कंपनियों से शुरुआत होगी, जिसे 2028-29 तक बढ़ाकर 33 किया जाएगा।
यह पहल डिजिटल गवर्नेंस, हेल्थकेयर और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों में स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकती है। निवेशकों के नजरिए से देखें, तो सरकारी प्रोजेक्ट्स का सफल निष्पादन भविष्य में इन स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ी बिजनेस ग्रोथ की नींव रख सकता है।
