कर्नाटक सरकार ने नई 'Government First' पहल शुरू की है। इसके तहत **₹25 करोड़** का फंड रखा गया है, जो **100** स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों में अपनी तकनीक टेस्ट करने का मौका देगा। हर प्रोजेक्ट के लिए **₹25 लाख** तक का कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा।
स्टार्टअप्स के लिए सरकारी दरवाजे खुले
कर्नाटक सरकार की 'Government First' पहल का मुख्य मकसद नई तकनीक और प्रशासनिक कामकाज के बीच की दूरी को मिटाना है। यह कदम 'Karnataka Startup Policy 2025-30' का अहम हिस्सा है। अब तक सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए स्टार्टअप्स को पुराने अनुभव की जरूरत होती थी, लेकिन इस नए प्रोग्राम में इसे खत्म कर दिया गया है।
कैसे मिलेगा फायदा?
- बजट: अगले तीन वर्षों के लिए ₹25 करोड़ का आवंटन।
- अनुबंध: प्रति स्टार्टअप ₹25 लाख तक के पायलट वर्क ऑर्डर।
- क्षेत्र: हेल्थकेयर, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मोबिलिटी जैसे सेक्टर पर फोकस।
- अधिकार: स्टार्टअप्स के पास अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) का पूर्ण मालिकाना हक रहेगा।
चुनौतियां और रिस्क फैक्टर
योजना सुनने में जितनी शानदार है, जमीनी स्तर पर इसके कार्यान्वयन (Execution) को लेकर चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सरकारी विभागों के पुराने 'लेगेसी सिस्टम' में स्टार्टअप्स की नई तकनीक को जोड़ना तकनीकी रूप से मुश्किल हो सकता है। साथ ही, सिलेक्शन कमेटी की पारदर्शिता और पायलट प्रोजेक्ट्स का बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलना इस योजना की सफलता तय करेगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कितने पायलट प्रोजेक्ट्स सफल होकर बड़े मल्टी-डिपार्टमेंटल कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलते हैं। स्टार्टअप्स के लिए यह एक 'गोल्डन अपॉर्चुनिटी' है, बशर्ते सरकारी विभागों में इसे तेजी से अडॉप्ट किया जाए।
