नई फंड-ऑफ-फंड्स रणनीति
JITO Incubation and Innovation Foundation (JIIF) सिर्फ सीधे निवेश करने के बजाय अब फंड-ऑफ-फंड्स (fund-of-funds) के रास्ते पर चल पड़ी है। कंपनी ने एटॉमिक कैपिटल (Atomic Capital) में ₹26.5 करोड़ का निवेश किया है। इस कदम से JIIF, एटॉमिक कैपिटल की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके भारत में अर्ली ग्रोथ-स्टेज कंज्यूमर (consumer) और कंज्यूमर-टेक स्टार्टअप्स (consumer-tech startups) में निवेश के नए अवसर तलाशेगी। यह स्ट्रेटेजी JIIF के पोर्टफोलियो को और डाइवर्सिफाई (diversify) करेगी और ऐसे डील फ्लो (deal flow) तक पहुंच बढ़ाएगी जो शायद सीधे तौर पर मिलना मुश्किल हो। इंडस्ट्री में भी यही ट्रेंड देखा जा रहा है, जहाँ फंड-ऑफ-फंड्स के जरिए ज्यादा एसेट्स और अलग-अलग स्ट्रेटेजीज़ में निवेश संभव होता है।
APAC एक्सीलरेटर की योजना
इसके साथ ही, JIIF एशिया-पैसिफिक (APAC) रीजन, जिसमें भारत, मिडिल ईस्ट और साउथ ईस्ट एशिया शामिल हैं, के लिए एक एक्सीलरेटर प्रोग्राम (accelerator program) लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस विस्तार से JIIF का लक्ष्य इन तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम (startup ecosystems) का फायदा उठाना है। यह प्रोग्राम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक (fintech), क्लाइमेट टेक्नोलॉजी (climate technology) और मोबिलिटी (mobility) जैसे फोकस सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करेगा। साउथ ईस्ट एशिया के वीसी मार्केट (VC market) में बड़ा बदलाव आया है; जहाँ सीड फंडिंग (seed funding) आधी हो गई है, वहीं लेट-स्टेज डील्स (late-stage deals) बढ़ रही हैं। इससे साफ है कि निवेशक अब प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) और कैपिटल एफिशिएंसी (capital efficiency) पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। भारत की ग्रोथ भी सालाना 14.05% रहने का अनुमान है, जो इस रीजन के महत्व को दर्शाता है।
स्टार्टअप फंडिंग का माहौल
JIIF के मौजूदा निवेशों में कंज्यूमर और D2C (Direct-to-Consumer) का हिस्सा 25%, AI/डीपटेक (Deeptech) का 15%, और फिनटेक का 15-20% है। कंपनी 20-30% या उससे ज्यादा के इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (IRR) का लक्ष्य रखती है। हालांकि, मौजूदा वीसी मार्केट (VC market) काफी सिलेक्टिव (selective) हो गया है। अब स्टार्टअप्स की फाइनेंशियल परफॉरमेंस (financial performance) और प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) की ओर स्पष्ट रास्ते पर खास ध्यान दिया जा रहा है। AI में भी कम लेकिन बड़े साइज की डील्स देखी जा रही हैं, जिसका मतलब है कि फंडिंग कुछ चुनिंदा कंपनियों में ही केंद्रित हो रही है। JIIF का टिपिकल निवेश साइज ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ रहता है, जो अर्ली-स्टेज और सीड फंडिंग एरिया में आता है।
संभावित चुनौतियां
JIIF की नई रणनीति में कई सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन इन्हें लागू करने में कुछ बड़े जोखिम भी हैं। एक साथ डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट, एटॉमिक कैपिटल के जरिए फंड-ऑफ-फंड्स और मल्टी-कंट्री एक्सीलरेटर को मैनेज करना काफी कॉम्प्लेक्स हो सकता है। एटॉमिक कैपिटल जैसे पार्टनर फंड्स पर निर्भरता, JIIF की अपनी अनूठी इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज (unique investment opportunities) को लगातार सुरक्षित करने और अर्ली-स्टेज इन्वेस्टमेंट की क्वालिटी पर नजर रखने की क्षमता पर सवाल खड़े कर सकती है। एग्जिट (exits) का सेकेंडरी सेल्स (secondary sales) और बायबैक (buybacks) पर निर्भर रहना मार्केट लिक्विडिटी (market liquidity) पर निर्भर करता है; मंदी की स्थिति में इन्वेस्टमेंट का समय बढ़ सकता है और लक्ष्य IRR प्रभावित हो सकते हैं। APAC के अलग-अलग इकोनॉमिक और रेगुलेटरी माहौल में एक एक्सीलरेटर लॉन्च करना भी लॉजिस्टिकल और स्ट्रैटेजिक चुनौतियां पैदा करेगा।
आगे की योजना
JIIF अगले 12-18 महीनों में ₹80-100 करोड़ का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रही है। इसका मकसद हर साल 20-25 स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना है। अर्ली-स्टेज फंडिंग में यह निरंतर प्रतिबद्धता, खासकर अपने टारगेट टेक सेक्टर्स में, नई कंपनियों की क्षमता में JIIF के विश्वास को दर्शाती है। डायरेक्ट और इनडायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के साथ-साथ एक्सीलरेटर सपोर्ट का यह संयोजन, JIIF को भारत और व्यापक APAC रीजन में उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपनी भूमिका निभाने और उनसे लाभ उठाने के लिए तैयार करता है।