EV चार्जिंग स्टार्टअप Ionage ने प्री-सीरीज A राउंड में **$1.3 मिलियन** जुटाए हैं। कंपनी का लक्ष्य अपने सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में अलग-अलग चार्जिंग नेटवर्क को जोड़ना है ताकि यूजर्स को बेहतर सुविधा मिल सके।
बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Ionage ने 7 अक्टूबर, 2026 को प्री-सीरीज A फंडिंग राउंड में $1.3 मिलियन जुटाने का ऐलान किया है। विमल कुमार वी और वरुण चंद्रन द्वारा 2021 में स्थापित यह कंपनी फिजिकल चार्जिंग हार्डवेयर बनाने के बजाय एक सॉफ्टवेयर मिडलवेयर प्रोवाइडर के तौर पर काम करती है।
इकोसिस्टम को जोड़ने की कोशिश
भारतीय EV मार्केट में फिलहाल अलग-अलग चार्जिंग ऑपरेटरों की भरमार है, जिससे यूजर्स को चार्जिंग पॉइंट खोजने और पेमेंट करने के लिए कई अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। Ionage का प्लेटफॉर्म इन बिखरे हुए नेटवर्क को एक साथ लाकर यूजर्स का अनुभव आसान बनाना चाहता है। कंपनी अभी 25,000 से ज्यादा फोर-व्हीलर चार्जिंग पॉइंट्स और 63 से अधिक फ्लीट्स को अपनी सेवाएं दे रही है।
एसेट-लाइट मॉडल का फायदा
कंपनी का बिजनेस मॉडल 'एसेट-लाइट' है, जिसका मतलब है कि उन्हें चार्जिंग स्टेशन लगाने में भारी-भरकम निवेश नहीं करना पड़ता। इसके बजाय, वे उस सॉफ्टवेयर लेयर पर फोकस करते हैं जो इन स्टेशनों को मैनेज करती है। नई फंडिंग के साथ, कंपनी अगले एक साल में 20 मिलियन यूनिट से ज्यादा मंथली एनर्जी थ्रूपुट का लक्ष्य लेकर चल रही है, खासकर टियर-2 शहरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
चुनौतियां और रिस्क
इस ग्रोथ के बावजूद सेक्टर में कुछ ऑपरेशनल रिस्क भी हैं। भारत में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की रिलायबिलिटी (Reliability) और अपटाइम (Uptime) एक बड़ी समस्या है। चूंकि Ionage थर्ड-पार्टी हार्डवेयर पर निर्भर है, इसलिए यदि चार्जिंग स्टेशनों का मेंटेनेंस खराब रहता है, तो सॉफ्टवेयर की प्रभावशीलता भी सीमित हो सकती है। भविष्य में ग्रिड स्टेबिलिटी के लिए कंपनी एआई-बेस्ड लोड बैलेंसिंग पर काम करने की योजना बना रही है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर होगी।
