InspeCity: स्पेस स्टार्टअप को मिला ₹100 करोड़ का फंड, सैटेलाइट रिपेयरिंग की राह हुई आसान

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AuthorAditya Rao|Published at:
InspeCity: स्पेस स्टार्टअप को मिला ₹100 करोड़ का फंड, सैटेलाइट रिपेयरिंग की राह हुई आसान

IIT बॉम्बे के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप InspeCity ने प्री-सीरीज A राउंड में **₹100 करोड़** जुटाए हैं। इस फंडिंग का नेतृत्व Speciale Invest और मशहूर इन्वेस्टर आशीष कचौलिया ने किया है। कंपनी अगले **18 महीने** में **4** इन-ऑर्बिट मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है।

स्पेस टेक्नोलॉजी में एक बड़ी छलांग

IIT बॉम्बे से निकले स्टार्टअप InspeCity ने अब अपनी टेक्नोलॉजी को स्पेस में टेस्ट करने के लिए कमर कस ली है। इस ₹100 करोड़ की फंडिंग राउंड में Speciale Invest और आशीष कचौलिया के अलावा Antler Elevate, Antler India और Shastra VC जैसे बड़े नाम भी शामिल हुए हैं। कंपनी मुख्य रूप से ISAM यानी इन-स्पेस सर्विसिंग, असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम कर रही है।

मिशन का मकसद और टेक्नोलॉजी

अभी तक सैटेलाइट में फ्यूल खत्म होने या तकनीकी खराबी आने पर उन्हें स्पेस डेब्रिस (कचरा) मान लिया जाता था। InspeCity इस समस्या का हल लेकर आई है। कंपनी अपनी तीन प्रमुख तकनीकों पर काम कर रही है:

  • GITA: यह एक प्रोपल्शन सिस्टम है जो सैटेलाइट को नेविगेट करने में मदद करेगा।
  • CHAKSU: यह प्रॉक्सिमिटी सेंसिंग तकनीक है जो स्पेस में ऑब्जेक्ट्स की पहचान करेगी।
  • VEDA: यह सिस्टम सैटेलाइट की उम्र बढ़ाने (Life Extension) के लिए डिजाइन किया गया है।

अगले 12 से 18 महीने में कंपनी अपने इन 4 मिशनों के जरिए अपनी तकनीक को लैब से बाहर निकालकर कमर्शियल लेवल पर साबित करेगी।

रिस्क और चुनौतियां

हालांकि यह क्षेत्र काफी संभावनाओं से भरा है, लेकिन डीपटेक में रिस्क भी कम नहीं है। स्पेस में हार्डवेयर टेस्टिंग काफी महंगी है और किसी भी मिशन की असफलता कंपनी को बड़ा आर्थिक झटका दे सकती है। साथ ही, अभी यह देखना बाकी है कि क्या सैटेलाइट ऑपरेटर्स वास्तव में ऐसी सर्विसिंग के लिए भारी भरकम भुगतान करने को तैयार हैं। आने वाले समय में कंपनी का मिशन रोडमैप और उनके हार्डवेयर का प्रदर्शन ही इस स्टार्टअप की सफलता की दिशा तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.