Infosys के को-फाउंडर Kris Gopalakrishnan ने भारतीय कंपनियों को सलाह दी है कि वे केवल इंटरनल R&D पर निर्भर रहने के बजाय स्टार्टअप अधिग्रहण और एकेडमिक पार्टनरशिप जैसे 'एक्सटर्नल' तरीकों को अपनाएं, ताकि इनोवेशन की रफ्तार तेज हो सके।
Infosys के को-फाउंडर और CII सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के चेयरमैन Kris Gopalakrishnan ने कॉर्पोरेट रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के पुराने ढर्रे पर सवाल उठाए हैं। CII Startupreneur Awards के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को इनोवेशन में निवेश करने के नजरिए को बदलने की जरूरत है। उनका मानना है कि सफलता को केवल इंटरनल खर्च से मापने के बजाय, कंपनियों को बाहरी सहयोग और स्टार्टअप्स के अधिग्रहण पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।\n\n### फाइनेंशियल नजरिया और दक्षता\nवित्तीय दृष्टिकोण से, यह बदलाव 'स्पीड' और 'कैपिटल एफिशिएंसी' के लिए बेहद जरूरी है। इन-हाउस रिसर्च में अक्सर लंबा समय लगता है और ओवरहेड लागत भी ज्यादा होती है। वहीं, स्टार्टअप्स को खरीदने से स्थापित कंपनियों को तुरंत नई टेक्नोलॉजी और टैलेंट मिल जाता है। भारतीय IT सेक्टर में TCS, Wipro, और HCLTech जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही क्लाउड, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसी क्षमताओं के लिए छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करती रही हैं।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम और चेतावनी\nहालांकि, यह रणनीति जोखिम से मुक्त नहीं है। स्टार्टअप्स को खरीदने के लिए अक्सर प्रीमियम चुकाना पड़ता है, जो बैलेंस शीट पर 'गुडविल' के रूप में दिखता है। यदि टेक्नोलॉजी स्केल नहीं हो पाती या इंटीग्रेशन में देरी होती है, तो कंपनी को बड़ा नुकसान हो सकता है। साथ ही, बड़ी कंपनी और छोटे स्टार्टअप के बीच कल्चरल मतभेद भी बड़ी चुनौती होते हैं।\n\nनिवेशकों को यह देखना चाहिए कि मैनेजमेंट इन अधिग्रहणों से मार्जिन और रेवेन्यू ग्रोथ बढ़ाने की क्या योजना बना रहा है। लंबी अवधि में वही कंपनियां सफल होंगी जो बिना अत्यधिक कर्ज लिए या मार्जिन घटाए, इन नई टेक्नोलॉजीज को अपने मुख्य बिजनेस में सफलतापूर्वक जोड़ सकेंगी।
