भौगोलिक फैलाव और सेक्टर पर फोकस
कैपिटल (Capital) की हिस्सेदारी अभी भी बहुत केंद्रित है, भले ही भारत के मुख्य इनोवेशन हब (Innovation hub) के बाहर 68,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स मौजूद हों। जयपुर, सूरत और इंदौर जैसे उभरते शहर नए वेंचर्स के लिए अहम ठिकाने बन रहे हैं, पर स्टार्टअप्स देश भर में एक समान रूप से नहीं बन रहे हैं। इन इलाकों में सेक्टर एक्टिविटी (Sector activity) ज़्यादातर डिमांड-ड्रिवन (Demand-driven) है, जो एडटेक (EdTech), इंटरनेट-फर्स्ट मीडिया (Internet-first media) और फैशन टेक (Fashion Tech) जैसे प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देती है। ये ऐसे प्लेटफॉर्म्स हैं जो लोकल डिमांड (Local demand) को पूरा करते हैं और डीप-टेक (Deep-tech) या एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर (Enterprise software) वेंचर्स की तुलना में कम कैपिटल (Capital) की ज़रूरत रखते हैं, जो बड़े शहरों में पाए जाते हैं।
फंडिंग की हकीकत: शुरुआती दौर बनाम लेट-स्टेज
2016 से 2025 के बीच, बड़े हब के बाहर के स्टार्टअप्स ने करीब $3.2 बिलियन जुटाए हैं, जो लगभग 2,200 फंडिंग राउंड्स (Funding rounds) के ज़रिए आए। ग्लोबल (Global) स्तर पर गिरावट से पहले 2021-22 साइकिल में निवेश अपने चरम पर था। डील्स का औसत साइज़ (Median deal size) बढ़ा है, जो बताता है कि इन्वेस्टर्स (Investors) ज़्यादा सिलेक्टिव (Selective) हो रहे हैं। सीड फंडिंग (Seed funding) में अच्छी तेज़ी दिखी है, जो 2016 में $27 मिलियन से बढ़कर 2025 में $167 मिलियन हो गई। हालांकि, लेट-स्टेज कैपिटल (Late-stage capital) की स्थिति अभी भी अस्थिर है। यह 2022 में $564 मिलियन तक पहुंचा था, लेकिन तब से इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया है। यह इन इलाकों में महत्वपूर्ण ग्रोथ कैपिटल (Growth capital) सुरक्षित करने की कठिनाई को दर्शाता है।
स्केलिंग की बाधाएं और एग्जिट का परिदृश्य
सीमित लेट-स्टेज फंडिंग सीधे तौर पर बड़े शहरों के बाहर के स्टार्टअप्स के ग्रोथ (Growth) के रास्तों को बाधित करती है। हालांकि $100 मिलियन से बड़े मेगा-राउंड्स (Mega-rounds) दुर्लभ हैं, DeHaat और Meril जैसी कंपनियों ने दिखाया है कि महत्वपूर्ण ग्रोथ हासिल करना मुमकिन है, पर उनकी सफलता असाधारण लगती है। फंडिंग मुख्य रूप से एंजेल नेटवर्क्स (Angel networks) और सीड इन्वेस्टर्स (Seed investors) से आती है, जिनके टिपिकल चेक साइज़ (Cheque size) $230,000 से $3 मिलियन के बीच होते हैं। 2026 की शुरुआत तक, केवल दो स्टार्टअप्स - CarDekho और Molbio Diagnostics - ही यूनिकॉर्न (Unicorn) का दर्जा हासिल कर पाए थे। 2016 और 2025 के बीच, 102 एक्विजिशन (Acquisitions) और 33 IPOs हुए, जिनमें एक्विजिशन एग्जिट (Exit) का मुख्य जरिया बना।
नॉन-मेट्रो इकोसिस्टम के लिए आगे का रास्ता
रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि भारत के बड़े शहरों के बाहर के स्टार्टअप इकोसिस्टम (Ecosystem) शुरुआती प्रयोगों से निकलकर सिलेक्टिव मैच्योरिटी (Selective maturity) की ओर बढ़ रहे हैं। टिकाऊ विकास (Sustained growth) मिड-स्टेज फंडिंग (Mid-stage funding) चैनलों को मज़बूत करने, टैलेंट (Talent) की उपलब्धता में सुधार करने और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट (Institutional support) को बढ़ाने पर निर्भर करेगा। जैसे-जैसे ये रीजनल क्लस्टर (Regional clusters) विकसित होंगे, वे भारत के इनोवेशन लैंडस्केप (Innovation landscape) में और अधिक महत्वपूर्ण योगदान देंगे, डायवर्सिफिकेशन (Diversification) और रेजिलिएंस (Resilience) प्रदान करेंगे, भले ही स्थापित हब कैपिटल (Capital) और स्केलिंग (Scaling) में अपना फायदा बनाए रखें।