RDI Fund का बड़ा ऐलान: 22 डीपटेक कंपनियों को मिलेंगे ₹2,192 करोड़

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AuthorMehul Desai|Published at:
RDI Fund का बड़ा ऐलान: 22 डीपटेक कंपनियों को मिलेंगे ₹2,192 करोड़

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भारत सरकार के रिसर्च एंड डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड ने 22 डीपटेक कंपनियों के लिए ₹2,192 करोड़ के बड़े फंड का ऐलान किया है। इस पैसे का सबसे बड़ा हिस्सा स्पेस-टेक सेक्टर को मिला है। यह फंड स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप से बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन तक पहुंचने में मदद करेगा, जिससे उन्हें तुरंत इक्विटी बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या हुआ?

भारत सरकार के रिसर्च एंड डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड ने 22 डीपटेक कंपनियों के लिए ₹2,192.32 करोड़ के सपोर्ट पैकेज का ऐलान किया है। इस फंड का मकसद उन स्टार्टअप्स की ग्रोथ को तेज करना है जो कॉम्प्लेक्स टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। ऐसी कंपनियों को आमतौर पर रेवेन्यू जेनरेट करने से पहले लंबे रिसर्च और टेस्टिंग की जरूरत होती है। इस बार स्पेस-टेक सेक्टर को सबसे ज्यादा, यानी ₹833.89 करोड़ की मदद मिली है। फंड के लिए 124 प्रपोजल आए थे, जिनमें से 22 कंपनियों को चुना गया है। Agnikul Cosmos, Dhruva Space, और GalaxEye जैसी कंपनियों को इस फंड का लाभ मिलेगा।

निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?

डीपटेक कंपनियां, जो हार्डवेयर, रोबोटिक्स, एडवांस्ड मटेरियल और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं, एक खास चुनौती का सामना करती हैं जिसे 'सेकंड वैली ऑफ डेथ' कहा जाता है। यह वह मुश्किल दौर होता है जब कंपनी के पास लैब में एक वर्किंग प्रोटोटाइप तो होता है, लेकिन उसे कमर्शियल प्रोडक्ट में बदलने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं होती। स्टैंडर्ड वेंचर कैपिटल (VC) फंड जल्दी रिटर्न चाहते हैं, जो इन कंपनियों के लिए शुरुआती चरणों में देना मुश्किल होता है। RDI फंड 3-4% की ब्याज दर पर 12 से 15 साल की लंबी अवधि के लिए 'धैर्यवान पूंजी' (patient capital) उपलब्ध करा रहा है। इस स्ट्रक्चर से फाउंडर्स को अपनी कंपनी का बड़ा हिस्सा इक्विटी इन्वेस्टर्स को दिए बिना एक्सपेंशन के लिए फंड मिल सकेगा, जिससे भविष्य के लिए वैल्यू बनी रहेगी।

स्पेस-टेक में बड़ा बदलाव

कुल फंड का 35% से ज्यादा सिर्फ स्पेस-टेक में जाना, भारत की इंडस्ट्रियल स्ट्रैटेजी में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। भारत सॉफ्टवेयर सर्विसेज के लिए तो एक ग्लोबल हब है ही, लेकिन अब एयरोस्पेस जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर्स में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) और मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ये स्टार्टअप्स पहले से ही ग्लोबल मार्केट में अपनी सर्विसेज बेचने की तैयारी कर रहे हैं। Agnikul Cosmos जैसी कंपनियां अपनी कमर्शियल प्रासंगिकता साबित करने में जुटी हैं, और सरकारी बैकिंग इस सेक्टर के लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल का एक तरह से सत्यापन है।

जोखिम और एग्जीक्यूशन की चुनौतियाँ

हालांकि यह फंड कंपनियों को एक मजबूत फाइनेंशियल रनवे देगा, डीपटेक बिजनेस मॉडल में जोखिम हमेशा बना रहता है। सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) स्टार्टअप्स के विपरीत, जिन्हें कम इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तेजी से स्केल किया जा सकता है, डीपटेक के लिए भारी एसेट्स, स्पेशल टैलेंट और कॉम्प्लेक्स सप्लाई चेन की जरूरत होती है। इन्वेस्टर्स के लिए मुख्य जोखिम 'लंबा जेस्टेशन पीरियड' है - यानी किसी प्रोजेक्ट को ड्राइंग बोर्ड से एक्चुअल मार्केट सेल तक पहुंचने में लगने वाला समय। यदि ये कंपनियां अपनी टेक्नोलॉजिकल सफलताओं को तय समय-सीमा के अंदर लगातार रेवेन्यू स्ट्रीम में नहीं बदल पातीं, तो कम ब्याज दर के बावजूद कर्ज का बोझ एक चुनौती बन सकता है। इसके अलावा, इन कंपनियों को अक्सर ग्लोबल प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है जिनके पास ज्यादा पैसा और स्थापित सप्लाई नेटवर्क हो सकता है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

इकोसिस्टम पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, इन कंपनियों की सफलता को अल्पावधि में पारंपरिक तिमाही नतीजों से नहीं मापा जाएगा। इसके बजाय, प्रगति के मुख्य संकेतक होंगे: मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का सफल कमीशनिंग, ग्लोबल ग्राहकों से कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की क्षमता, और डेवलपमेंट टाइमलाइन का पालन। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि ये कंपनियां इस नए डेट फैसिलिटी के साथ अपने कैश बर्न को कैसे मैनेज करती हैं। इन स्टार्टअप्स की 'कमर्शियल वायबिलिटी' हासिल करने की क्षमता - यानी टेस्टिंग से मुनाफा कमाकर प्रोडक्ट बेचने तक का सफर - इस डीपटेक पुश की सस्टेनेबिलिटी के लिए सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.